साप्ताहिक व्यंग्य कॉलम शब्द बाण भाग – 141
21 जून 2026
शैलेन्द्र ठाकुर । दंतेवाड़ा
टीआई को मिला ओटीपी
दक्षिण बस्तर में पत्रकारों को आपराधिक प्रकरण में फंसाने और सबूतों से छेड़छाड़ के आरोप में चर्चित रहे पूर्व कोंटा टीआई को गृह विभाग ने अब मैदानी इलाके में पोस्टिंग दे दी है। पत्रकारों का आरोप है कि सरकार ने रस्सी को सांप बनाने के हुनरमंद इस टीआई को पुरस्कृत किया है। जबकि पत्रकारों के तत्कालीन विरोध और गुस्से को शांत करवाने के लिए सरकार ने सस्पेंड किया था और हल्की-फुल्की व मामूली धाराएं लगाकर जेल यात्रा भी करवा दी। धाराएं ऐसी कि उसमें आपराधिक षड्यंत्र और नारकोटिक्स संबंधी कोई मामला ही नहीं बनता था। फिर कुछ समय बाद टीआई मजे से बहाल भी हो गया और अब नक्सल क्षेत्र से ऐसे मैदानी क्षेत्र में तबादला पा गया, जिसे पाने के लिए दूसरे अफसरों को बहुत सारे पापड़ बेलने पड़ते हैं। कुल मिलाकर विवादित टीआई को एक तरह से ओटीपी यानी आउट ऑफ टर्न प्रमोशन ही मिल गया। बहुत जल्द ही इस टीआई को वीरता पदक भी मिल जाए तो कोई आश्चर्य वाली बात नहीं होगी।
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बिना सेनापति के लड़ रही कांग्रेस
दंतेवाड़ा जिले में कांग्रेस की स्थिति बिना सेनापति वाली सेना जैसी हो गई है। कांग्रेस कमेटी के जिलाध्यक्ष महीनों से अज्ञातवास पर चले गए हैं, जिनके पद से इस्तीफे की चर्चा तो है, लेकिन इस्तीफे की बात अधिकृत रूप से स्वीकार करने को कोई नेता तैयार नहीं हैं। यह मामला पार्टी को न निगलते बन रहा है, न उगलते। पार्टी नए अध्यक्ष की नियुक्ति तक नहीं कर पा रही है, जबकि इस पद के कई दावेदार अवसर को लपकने को तैयार हैं। इन सब के बीच नेतृत्व विहीन हो चुकी कांग्रेस के हाथ से कई बड़े मुद्दे हाथ से फिसलते जा रहे हैं, जिनमें पार्टी सरकार को आसानी से घेर सकती थी। भाजपा की सरकार को बने हुए ढाई साल बीत चुके हैं और अगले चुनाव में लगभग इतना ही वक़्त बाकी रह गया है, ऐसे में चुनाव की दीर्घकालिक रणनीति बनाने के लिए पार्टी में कोई खास काम नहीं हो रहा है।
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खत्म नहीं हो रहा शिक्षकों का वनवास
दक्षिण बस्तर में पदस्थ कई शिक्षकों को पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने चुन – चुन कर जिले के बाहर भेज दिया था, कुछ को प्रमोशन के नाम पर, तो कुछ को भाजपा समर्थक होने का टैग लगाकर जिले से बाहर फेंका था। सरकार बदलने के बाद भी ऐसे कई शिक्षक घर – परिवार से दूर रहकर अब तक वनवास काट रहे हैं। कुछ ने तो बड़े ऑफिस में चढ़ावा चढ़ाकर घर वापसी करवा लिया, लेकिन जो लोग नई सरकार से मुफ्त में न्याय मिलने की उम्मीद लगाए बैठे थे, उनका वनवास खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। उनकी स्थिति ऐसी हो गई है –
किस पर करें भरोसा, किस पर करें ऐतबार हम,
जिसे अपना समझते हैं वही बेगाना निकलता है।
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बुलडोजर एक्शन पर बवाल
सुकमा जिले में प्रशासन के बुलडोजर एक्शन को लेकर बवाल मचा हुआ है। कांग्रेस नेता हरीश कवासी ने कार्रवाई को गलत ठहराते हुए आपत्ति जताई है।
प्रभावित का आरोप है कि खरीदकर रजिस्ट्री की हुई जमीन पर निर्माणाधीन स्ट्रक्चर को बिना सूचना दिए जमींदोज कर दिया गया। वहीं दूसरा पक्ष इसे अवैध कॉलोनी बताकर पल्ला झाड़ने में व्यस्त है। वैसे, जानकार बताते हैं कि प्रशासन का यही तोडू बुलडोजर कभी पावारास में सरकारी जमीन पर अतिक्रमण से बने मकान तोड़ने निकला था, लेकिन रसूखदार नेताओं के फोन कॉल्स के असर से बैरंग ही लौट गया। इस बार ऐसी कोई चुनौती थी ही नहीं।
यानी प्रशासनिक कार्रवाई में भी भेदभाव!
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ज्यादा माइलेज वाली गैस
दक्षिण बस्तर में रसोई गैस उपभोक्ता 45 दिन वाली क्राइटेरिया से परेशान हैं। ईरान अमेरिका के बीच हुई जंग से हॉर्मूज स्ट्रेट वाला जो संकट उत्पन्न हो गया था, वो गतिरोध भी समाप्त हो चुका, लेकिन 45 दिन बाद ही रसोई गैस सिलेंडर लेने की बाध्यता खत्म नहीं हुई। सबसे ज्यादा दिक्कत ग्रामीण क्षेत्र वाली एजेंसियों को है। शहरी क्षेत्र में 35 दिनों में गैस रिफिल की छूट है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र के नाम से दर्ज दंतेवाड़ा, गीदम की एजेंसियों से 45 दिन बाद ही रिफिल मिलता है। यानी सरकार के हिसाब से ग्रामीण क्षेत्र का गैस सिलेंडर ज्यादा माइलेज देता है। अब लोग परेशान होकर अकबर – बीरबल के किस्से जैसे सिर पर खाट रखकर आधी धूप आधी छांव वाली पहेली सुलझा रहे हैं। आधे दिन गैस पर खाना पकाते हैं, गैस खत्म होने पर इंडक्शन या लकड़ी का चूल्हा सुलगाना पड़ता है।
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का वर्षा, जब कृषि सुखाने ..
डिप्टी सीएम व पीडब्ल्यूडी मिनिस्टर ने हाल ही में बस्तर का धुंआधार दौरा कर पीडब्ल्यूडी अफसरों व ठेकेदारों की जमकर क्लास ली। निर्माण कार्यों की धीमी प्रगति पर खासी नाराजगी जताई, लेकिन उनकी यह कवायद कोई खास रिजल्ट देती नहीं दिख रही है, क्योंकि मानसून आगमन का समय हो चुका है और काम में प्रोग्रेस तो अब मानसून सीजन बीतने के बाद ही आ पाएगा। यानी 4 महीने बाद ही पुल – पुलिए का काम रफ्तार पकड़ेगा। समय रहते यही निरीक्षण हो गया होता, तो शायद अब तक कई बड़े प्रोजेक्ट पूरे हो चुके होते। का वर्षा, जब कृषि सुखाने.. वाली यह स्थिति है। यानी फसल सूख जाने के बाद बारिश का होना।
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योग का बदला विभाग
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर इस बार काफी कुछ बदला – बदला हुआ नज़र आया। सरकार ने योग को अब आयुष विभाग के हवाले कर दिया है। इसके पहले कभी खेल विभाग को, तो कभी समाज कल्याण विभाग को इसके आयोजन की जिम्मेदारी दी जाती थी है। खैर, इस योग दिवस पर उपस्थिति में खासी कमी देखी गई। नेताओं से लेकर अफसर तक कम नज़र आए। वैसे भी राज योग और हठ योग साधना में ज्यादा दिलचस्पी लेने वाले लोग सहज योग व प्राणायाम में दिलचस्पी पहले भी कम ही दिखाते रहे हैं।
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चलते – चलते
दंतेवाड़ा जिले में कुआकोंडा जनपद पंचायत के सीईओ का मामला हमेशा सुर्खियों में रहता है। पिछले कुछ समय से सरकार यहां योग्य व पूर्णकालिक जनपद सीईओ नहीं भेज पा रही है। नक्सलवाद से बुरी तरह ग्रस्त रह चुके इस ब्लॉक को इस समय तीव्र गति से विकास की जरूरत है, ऐसे समय में भी जनपद सीईओ के पद को लेकर सरकार में गंभीरता नहीं दिख रही है।
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