पीडब्ल्यूडी मिनिस्टर के कड़े तेवर ..(शब्द बाण – 139)

पीडब्ल्यूडी मिनिस्टर के कड़े तेवर ..(शब्द बाण – 139)

साप्ताहिक व्यंग्य कॉलम शब्द बाण भाग – 139

7 जून 2026
शैलेन्द्र ठाकुर । दंतेवाड़ा

पीडब्ल्यूडी मिनिस्टर के कड़े तेवर

राज्य के डिप्टी सीएम व पीडब्ल्यूडी मिनिस्टर अरुण साव ने जगदलपुर और आसना के बीच बन रहे फ्लाईओवर कम ब्रिज का निरीक्षण किया । उन्होंने लेटलतीफी पर ठेकेदार व अफसरों को जिस ढंग से कड़ी फटकार लगाई, उससे लोग सहम गए। दंतेवाड़ा पहुंचने तक संबंधित विभागों के अफसरों की घिग्घी बंधी हुई थी।
हुआ भी यही, आते ही टेकनार में जल जीवन मिशन की सुस्त रफ्तार को लेकर मंत्री ने पीएचई अफसर की क्लास लगा दी। गनीमत यह रही कि दंतेवाड़ा नगर पंचायत में बीच से फटी हुई सीसी सड़क का निरीक्षण करने नहीं पहुंचे।

वैसे, पहली बार किसी पीडब्ल्यूडी मिनिस्टर के इतने कड़े तेवर देखकर आम जन खुश हैं। उनका मानना है कि काश! वे पहले इस ब्रिज का निरीक्षण कर गए होते तो शायद अब तक ये बनकर तैयार हो चुका होता। सरकार का ढाई साल वाला अढ़ैया खत्म होने के बाद इस तरह की ताजगी से अब काम-काज में तेजी आने की उम्मीदें जागी हैं।
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गड्ढे मुक्त सड़क का सपना अधूरा

राज्य के मुखिया ने करीब साल भर पहले सभी सड़कों को गड्ढा मुक्त बनाने के निर्देश दिए थे, लेकिन पीडब्ल्यूडी वालों ने उस पर समय रहते अमल नहीं किया। अब कई महीनों बाद ईरान – अमेरिका की लड़ाई में डामर महंगा हो गया, तो ठेकेदारों ने रेट बढ़ाने की मांग करते हुए डामर वाला काम बंद कर दिया है। इससे बीटी रिनीवल तो दूर, पैच वर्क तक नहीं हो पा रहा है। कम से कम भागते भूत की लंगोटी की तरह कुछ तो राहत जनता के हिस्से में आ जाती। इसका सबसे ताजा उदाहरण दंतेवाड़ा के टेकनार रोड में देखने को मिला, जहां पीडब्ल्यूडी मिनिस्टर के रविवार को होने वाले प्रवास के ठीक एक दिन पहले विभाग का अमला गड्ढों को ढंककर छिपाने की नाकाम कोशिश करता दिखा। कुछ गिट्टी, कुछ रेत मिलाकर कुछ गड्ढे ढंके गए, उस पर भी पूरे गड्ढे नहीं छिपाए जा सके।
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लिस्ट मेनिया या फोबिया ?
दक्षिण बस्तर में भाजपा नेताओं के लिए समय कुछ ठीक नहीं चल रहा है। दंतेवाड़ा जिलाध्यक्ष के खिलाफ समाज विशेष द्वारा शिकायत का मामला ठंडा हुआ भी नहीं था और सुकमा में भी सुशासन तिहार में सीएम के साथ मंच साझा करने और स्वागत करने वाले नेता कार्यकर्ताओं की लिस्ट को लेकर बवाल हो गया। विरोधियों ने इसमें खेमेबाजी का आरोप लगाया। लोग समझ नहीं पा रहे हैं कि डीलिस्टिंग अभियान में बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रही भाजपा खुद ही लिस्ट फोबिया से परेशान है, या लिस्ट मेनिया से। दरअसल, यहां सीएम से प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए भी पहली बार पत्रकारों की लिस्ट बनाने का नवाचार भी हुआ। कड़े सवाल पूछने की आशंका वाले मीडियाकर्मियों को डीलिस्ट कर दिया गया था।
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एसडीओ पर भारी सब इंजीनियर
कहते हैं कि दंतेवाड़ा में जो हो जाए, वो भी कम है। तभी तो डीएमएफ में पदस्थ सब इंजीनियर रैंक के संविदा इंजीनियर को असीमित अधिकार दिए गए हैं, जो राज्य सरकार के आरईएस, पीडब्ल्यूडी, पीएचई, एरिगेशन जैसे तकनीकी विभागों के एसडीओ रैंक के नियमित अफसरों द्वारा प्रमाणित एमबी रिपोर्ट एवं सीसी रिपोर्ट पर भी बुरी तरह कैची चलाने का साहस कर दिखाते हैं, जबकि नियमित एसडीओ द्वारा वेरिफाई किए गए तकनीकी दस्तावेजों को खारिज करना आसान नहीं होता। पावर को सुपरसीड करने की इस मनमानी स्थिति से विपक्ष ही नहीं, बल्कि सत्ता पक्ष के जन प्रतिनिधि व नेता खासे परेशान रहते हैं। इसकी शिकायत मंत्री स्तर पर भी पहुंच चुकी है, लेकिन फिलहाल कोई बदलाव होता नहीं दिख रहा है।
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सीएम प्रवास निपटने पर दावत
सुकमा जिले में सुशासन तिहार में पहुंचे मुख्यमंत्री के प्रवास को लेकर पूरा तंत्र इतनी टेंशन में रहा कि प्रवास सकुशल निपटने की खुशी में बड़े दावत का आयोजन किया गया। इसमें अफसरों ने व्यंजनों का लुत्फ उठाया। वैसे, सीएम साहब के रात्रि विश्राम करने का यह फायदा जिले को जरूर हुआ कि कई प्रमुख सड़कें स्ट्रीट लाइट से जगमगा उठीं। वरना, जिला मुख्यालय के भीतर ही इतनी कई बड़े प्रोजेक्ट और भवन निर्माण कार्य आधे – अधूरे पड़े हुए हैं। गांवों तक पहुंच मार्ग नहीं बन पाये हैं। नक्सलमुक्ति की फीलिंग ग्रामीणों को अच्छी तरह नहीं मिल पा रही है।
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पहली बार इंद्रावती पार लगी चौपाल
कभी नक्सलियों का अभेद्य गढ़ रहे अबूझमाड़ इलाके में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पहुंचकर चौपाल लगाई। दंतेवाड़ा जिले के चेरपाल में पहुंचकर उन्होंने ग्रामीणों की समस्याएं सुनी। इसके साथ ही वे इंद्रावती नदी के पार पहुंचने वाले पहले मुख्यमंत्री बन गए। नक्सलमुक्ति का संकल्प पूरा होने के बाद यह संभव हो सका। हालांकि, हर साल होने वाले नाव हादसों से मुक्ति दिलाने के लिए इंद्रावती नदी के कोड़नार घाट में पुल निर्माण की घोषणा की उम्मीद लगा रही जनता को निराशा ही हाथ लगी। फिर भी यह संतोष रहा कि अब मुख्यमंत्री आगमन के साथ ही विकास पहुंचने की संभावनाएं बढ़ गई हैं।
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मौसम अलर्ट का वाइब्रेशन
मौसम खराब होने, आंधी – बारिश और गाज गिरने की चेतावनी देने के लिए मौसम विभाग ने नया सिस्टम बनाया है। चेतावनी वाले मैसेज के साथ ही सभी मोबाइल एक साथ अचानक वाइब्रेट होने लगते हैं। पहली बार मैसेज आया तो लोग काफी घबराए हुए थे। लेकिन आए दिन बार – बार इस तरह के मैसेज आने और इसके बाद पूर्वानुमान जितनी गंभीर स्थिति नहीं होने से लोग इसे हल्के में लेने लगे हैं। कहीं ऐसा न हो कि भेड़िया आया, भेड़िया आया की तर्ज पर वास्तविक सूचना भी नकार दी जाए। मौसम विभाग को इसे दुरुस्त करने की जरूरत है।
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