फिर उभर आया बीजेपी का दर्द.. (शब्द बाण -138)

फिर उभर आया बीजेपी का दर्द.. (शब्द बाण -138)

साप्ताहिक व्यंग्य कॉलम ‘शब्द – बाण ‘ भाग – 138
31 मई 2026
शैलेन्द्र ठाकुर । दंतेवाड़ा

फिर उभरा दर्द
दक्षिण बस्तर में भाजपा में अंदरूनी कलह फिर सतह पर आ गया है। वैसे भी, यहां सत्ता की कमान को लेकर खींचतान हमेशा जारी रहती है। इसके बावजूद जिलाध्यक्ष का अश्वमेघ यज्ञ वाला घोड़ा दौड़ता ही रहता है। कई बार विरोधी धड़े ने घोड़ा पकड़कर चक्रवर्ती सम्राट को चुनौती देने की कोशिश की, लेकिन नाकाम रहे। जिलाध्यक्ष के राजयोग और संगठन महामंत्री के आशीर्वाद ने हर बार बचा लिया। एक – दो बड़े मामले भी आए, जिसमें विरोधियों की बांछे खिल आई, लेकिन कांग्रेस के कूद जाने की वजह से आलाकमान ने पार्टी की फजीहत के डर से अभयदान दे दिया। लेकिन इस बार मामला थोड़ा अलग है।
भाजपा जिलाध्यक्ष फिर विवादों में घिरते दिख रहे हैं। इस बार पार्टी के भीतर से ही आवाज़ उठी है और पार्टी कार्यकर्ता से बदसलूकी व गाली – गलौज करने की शिकायत पार्टी प्रदेशाध्यक्ष तक पहुंच गई है। एक बड़े जनाधार वाले समाज ने अपने लोगों से बदसलूकी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। देखने वाली बात यह होगी कि इस बार संगठन का सुदर्शन चक्र निकलता है या फिर शिशुपाल को कुल 100 गलतियां करने तक का मौका दिया जाता है।
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डीएफओ की छुट्टी
बीजापुर जिले में तेंदूपत्ता गोदाम में आग लगने और करोड़ों का तेंदूपत्ता जलकर खाक होने के मामले में सरकार ने डीएफओ को छुट्टी कर दी है। डीएफओ को सस्पेंड कर दिया गया है। संयोग से जिस डीएफओ को सस्पेंड कर हटाया गया है, वो पूर्व में दंतेवाड़ा डीएफओ रह चुके हैं और उनकी जगह जिनकी पोस्टिंग हुई है, वो भी दंतेवाड़ा डीएफओ रह चुके हैं। वैसे, इस घटना के तुरंत बाद जगदलपुर के सरगीपाल में भी एक तेंदूपत्ता गोदाम में रखे पत्ते भी आग से जलकर खाक हो गए हैं, जिससे बस्तर डीएफओ पर भी ऐसी ही कार्रवाई की तलवार लटकने लगी है। सरकार और आम जनता के टैक्स के पैसों से खरीदे गए तेंदूपत्ता की सुरक्षा में लापरवाही इस बार सरकार बर्दाश्त नहीं करेगी, इसकी पूरी उम्मीद जागी है।
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पर्यटन मंडल का मोटल
दंतेवाड़ा जिले में पर्यटन मंडल की गतिविधियां लगभग शून्य हो चुकी हैं। मंडल ने डॉ रमन के कार्यकाल में गीदम के नजदीक जो मोटल बनवाया था, वो खंडहर में तब्दील हो चुका है। इसे बारसूर में बनाया जाना था, लेकिन मंडल के अफसरों और ठेकेदार ने पर्यटकों की सुविधा की बजाय अपनी सुविधा के हिसाब से ऐसी सूनी जगह पर बना दिया, जहां नक्सली दहशत के चलते कोई ठहरने को तैयार नहीं होते थे। खासकर गीदम थाना लूट कांड की घटना सबके जेहन में रहती थी। खंडहर होते जा रहे मोटल का जीर्णोद्धार भी हुआ, लेकिन फिर भी स्थिति निर्मित हो गई। अब सत्ता में भाजपा की वापसी होने और नक्सलवाद के खौफ की विदाई के बावजूद इस मोटल के दुख भरे दिन बीतते नजर नहीं आ रहे हैं।

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उद्दंड बच्चे की तरह रेलवे
बस्तर में रेलवे की स्थिति किसी उद्दंड बच्चे से कम नहीं है। बैलाडीला की खदानों के लौह अयस्क ढुलाई से सालाना करोड़ों रुपए कमाने वाले रेलवे ने यहां का विकास अवरुद्ध कर रखा है। जिन इलाकों से होकर रेल पटरी बिछी है, इन्हीं इलाकों में रेलवे ट्रैक की वजह दर्जनों ग्रामीण सड़कें दशकों से बंद पड़ी हैं। लोग मीलों घुमावदार रास्ते से होकर मंजिल तय करते हैं। सेंट्रल विभाग होने की अकड़ के चलते रेलवे के अफसर न तो कलेक्टर की सुनते हैं, और न ही सांसद – विधायकों की सुनते हैं। विकास बाधित करने वालों में से नक्सलियों को तो केंद्रीय गृहमंत्री ने घर वापसी पर मजबूर कर दिया, लेकिन जन सामान्य का विकास बाधित करने वाले रेलवे जैसे अड़ियल विभाग का सरेंडर कैसे होगा, इसका जवाब किसी के पास नहीं है।
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बिना आग के धुंआ कैसे!
महिला व बाल विकास विभाग कहने को तो महिलाओं व बच्चों के संरक्षण, पोषण और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए कार्य करता है, लेकिन दक्षिण बस्तर में इसी विभाग के बड़े अफसरों पर महिलाओं के उत्पीड़न के आरोप लगते रहे हैं। बाद में साक्ष्य के अभाव में बरी भले ही हो जाते हों, पर दाल में कुछ काला तो जरूर है, वरना बिना आग के धुआं निकलना नामुमकिन है। फिलहाल, निलंबन झेल रहे जिला अधिकारी के मामले से पहले बाल संरक्षण से जुड़े विंग के एक अफसर पर भी ऐसा ही आरोप लगा था, जिससे नौकरी से हाथ धोने की नौबत आ गई थी। अब खबर है कि उक्त अफसर फिर से यही पद किसी भी कीमत पर पाने की फिराक में है। राजनीतिक और प्रशासनिक जैक लगाकर सिस्टम का पहिया बदलने पर सारा जोर लगा दिया है। इसी गोटीबाजी के चलते इस विभाग की भर्ती प्रक्रिया टल गई है। अब यह तो वक्त ही बताएगा कि पहले से पंक्चर स्टेपनी आईसीडीएस की गाड़ी में लगती है या नहीं।

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वर्क फ्रॉम होम को मचले कर्मी
सरकार ने पेट्रोल – डीजल की खपत कम करने की गरज से यह सलाह क्या दे दिया कि कोरोना काल की तरह अब फिर से वर्क फ्रॉम होम शुरू करने की जरूरत है, तो कर्मचारी संगठन सचमुच इसे लागू करने की मांग पर उतर आए हैं। उनकी मांग जायज भी है। इससे न सिर्फ डीजल – पेट्रोल की बचत होगी, बल्कि समय भी बचेगा और परिवार को ज्यादा समय दे पाएंगे। बायोमीट्रिक अटेंडेंस के लफड़े से भी मुक्ति मिलेगी।
वैसे भी पिछली भूपेश सरकार ने शनिवार अवकाश की जो कुप्रथा शुरू की थी, उसके साइड इफेक्ट से अगली भाजपा सरकार अब तक उबर नहीं सकी है। 5 डे वीक वाले इस कॉन्सेप्ट को लोग बेहतरीन तरीके से भुनाने में जुटे हुए हैं। दफ्तरों की कार्य संस्कृति वैसे ही ठप हो चुकी है।
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दूसरे के कंधे पर रखकर चलाई जाने वाली बंदूक

फिर हेराफेरी
दक्षिण – पश्चिम बस्तर के नगरीय निकायों में गड़बड़ी का एक और मामला उजागर हुआ है। इस बार मामला भोपालपटनम नगरीय निकाय का है। यहां फंड की हेरा- फेरी करने पर सीएमओ और लेखापाल नप गए। सरकार ने दोनों को सस्पेंड कर दिया है। दरअसल, प्रभारी सीएमओ के कंधे पर बंदूक रखकर चलाने वाले प्रभावशाली नेताओं की वजह से ऐसे मामले सामने आ रहे हैं। यही वजह है कि कई ‘एडजस्टेबल’ सीएमओ एक ही जगह टिककर टेस्ट मैच की लंबी पारी खेल रहे हैं। यह खेल दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा जिले में बरसों से जारी है।
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चलते – चलते…

उर्दू अदब के मशहूर शायर और गज़लकार डॉ बशीर बद्र साहब इस फ़ानी दुनिया से इसी हफ्ते रुख़सत हो गए। अपने पसंदीदा शायर डॉ बशीर बद्र  को इस कलमकार की तरफ से उन्हीं की पंक्तियों से सादर श्रद्धांजलि..

अजब चराग़ हूं दिन रात जलता रहता हूं,

मैं थक गया हूं हवा से कहो बुझाए मुझे’।

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ज़िंदगी तूने मुझे कब्र से भी कम दी है जमीं

पाँव फैलाऊं तो दीवार में सर लगता है।

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