पालिका में मैच फिक्सिंग .. (शब्द बाण – 135)

पालिका में मैच फिक्सिंग .. (शब्द बाण – 135)

साप्ताहिक व्यंग्य कॉलम शब्द बाण भाग – 135
(10 मई 2026)

शैलेन्द्र ठाकुर @bastatrupdate.com

पालिका में मैच फिक्सिंग
नगर पालिका दंतेवाड़ा में भी क्रिकेट मैच की तरह मैच फिक्सिंग का मामला सामने आया है। टेंडर से पहले ही ठेकेदारों के नाम तय हो गए और सूची सोशल मीडिया पर तैरने लगी। विवाद बढ़ता देख सूची निरस्त कर दी गई।
वैसे भी, इस नगर पालिका के कर्ता – धर्ताओं के कारनामे हमेशा चर्चा में रहते हैं। पिछले साल आई विनाशकारी बाढ़ आपदा के बाद इसे अवसर के रूप में भुनाने की पूरी तैयारी है। वजह साफ है कि आपदा के बाद जो राशि मिलने वाली है, उससे भले ही नगर का विकास हो न हो, टेलिंग्स पटाई से मिलने वाले माल की तरह मालामाल होने की पूरी संभावना है। विवादों से जुड़े रहने और काफी फजीहत करवाने के बाद भी तबादला सूची में सीएमओ का नाम नदारद रहने से इस थ्योरी को बल मिला है कि लोग यहां से टलना नहीं चाहते।
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पुलिस की तख्ती
बीते एक साल से अंदरूनी इलाकों में भी पुलिस की तख्ती लगी हुई गाड़ियां बेखौफ दौड़ रही हैं, जो नए बदलाव की पुष्टि कर रही है। एक – दो साल पहले तक लोग पुलिस की गाड़ियों में कोई भी प्रतीक चिह्न रखने की हिम्मत नहीं जुटा पाते थे, जिससे यह पता चले कि इस गाड़ी में पुलिस बैठी है। कारण यह था कि नक्सली मौका पाकर पुलिस पर हमला कर देते थे। बारूदी विस्फोट या स्मॉल एक्शन टीम के हमले की आशंका हमेशा बनी रहती थी। लोग बाइक और चारपहिया वाहन तक से पुलिस शब्द खरोंच कर मिटा दिया करते थें। पहचान छिपाकर सफर करना पुलिसकर्मियों की मजबूरी बन गई थी। अब हालात बदले हैं, तो लोग इसका भरपूर आनंद उठा रहे हैं।

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विकास की नई गाथा
नक्सलवाद की पीड़ा से लंबे समय तक पीड़ित रहे बीजापुर जिले में विकास भले ही नहीं पहुंच पाया हो, लेकिन मदिरा प्रेमियों के अरमान घोड़े की तरह सरपट दौड़ रहे हैं। यहां दूसरे प्रांतों से शराब की खेप जरूर धड़ल्ले से पहुंच रही है। मदिरा प्रेमियों को खुशी इस बात की है कि जिस ब्रांड की शराब सरकारी दुकानों में नहीं मिल पाती है, वो भी निजी ठिकानों में आसानी से उपलब्ध है। सूत्रों की मानें तो आवापल्ली जैसी जगहों में पड़ोसी राज्य उड़ीसा, पंजाब की डिस्टलरी उद्योगों की शराब मिलने लगी है । सरकारी दुकान से ज्यादा ब्रांड मिल रहे। अब ये कैसे संभव हो पाता है, ये तो आबकारी विभाग ही जाने, पर इतना अंधाधुंध विकास मदिरा प्रेमी पचा नहीं पा रहे हैं।
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कौन बनेगा डीएमसी ?

सुकमा जिले के शिक्षा विभाग में समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत डीएमसी यानी डिस्ट्रिक्ट मिशन कोआर्डिनेटर के पद को लेकर जोड़ – तोड़ शुरू हो गई है। दरअसल, वर्तमान डीएमसी के रिटायरमेंट से पद खाली हो गया है। अब इस पद पर अपना पसंदीदा अफसर बिठाने के लिए सत्ताधारी भाजपा और विपक्षी दल कांग्रेस के नेता अपनी – अपनी गोटी फिट करने में लगे हैं। विपक्ष में रहने के बावजूद कांग्रेसी पक्ष का पलड़ा ज्यादा भारी है। खबर यह भी है कि पड़ोसी जिले के एक पूर्व डीएमसी कांग्रेसियों की पहली पसंद हैं, जिन्हें सुकमा शिफ्ट करने की तैयारी चल रही है, जिनके पास अपनी तगड़ी सेटिंग की बदौलत बाहर अंदर वाले दादाओं को मैनेज करने और शासकीय खरीद फरोख्त का खासा अनुभव भी है। इस पोस्टिंग के पीछे का मुख्य मकसद अपने साथ – साथ पार्टी की बिगड़ती माली हालत को सुधारना भी है। लगभग निर्वासन जैसी स्थिति झेल रहे स्थानीय विधायक की अनुपस्थिति में पार्टी की हालत काफी खराब चल रही है।

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कसमें नहीं, तो वादे का क्या ?

बीजापुर जिले में टेंपरेचर सिर्फ क्लाइमेट का नहीं बढ़ता है, बल्कि सियासी और प्रशासनिक नुमाइंदों के गरम तेवर की वजह से भी यहां गर्मी बढ़ी रहती है। यही वजह है कि अफसर – नेताओं के बीच तनातनी की स्थिति अक्सर दिखाई देती है। इसे इस बात से समझ सकते हैं कि जिला पंचायत का चुनाव हुए अरसा बीत गया, लेकिन पद और गोपनीयता की शपथ अध्यक्ष समेत अन्य प्रतिनिधियों को अब तक नहीं दिलाई जा सकी। बात सिर्फ इतनी थी कि नए पदाधिकारी समारोहपूर्वक शपथ लेना चाहते थे, लेकिन सामने वाले को यह मंजूर नहीं था। नतीजा यह हुआ कि बिना कसम खाए ही काम चलाया जा रहा है। अब कसमें खाए बगैर वायदे कैसे निभाए जायेंगे, ये समझना जरा मुश्किल है। वैसे जिन्हें पूरे जिले के अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली हुई है, वो जिले की बजाय सिर्फ अपने क्षेत्र विशेष की चर्चा तक ही सीमित रह गए हैं, ऐसा विरोधी कहने लगे हैं। अब ये अफवाह है या सच, ये तो वही जानें।
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मातृ वंदना में भी झोल झाल
दंतेवाड़ा जिले में जिस महिला बाल विकास विभाग के जिला अधिकारी ही महिला उत्पीड़न के आरोप में सस्पेंड हो गए हों, उसी विभाग में अब प्रधानमंत्री मातृ वंदन योजना में बड़े झोल झाल की बात सामने आई है। इस योजना में पहले बच्चे के जन्म पर 5000 और दूसरी संतान बालिका होने पर 6 हजार रुपए देने का प्रावधान है । कटेकल्याण सेक्टर में सिर्फ एक समुदाय विशेष की महिलाओं के खाते में ही यह राशि ट्रांसफर होने का आरोप हैं, जिसका ठीक हिसाब नहीं मिल रहा है। इसके बाद भी मामले की निष्पक्षता से जांच और दोषियों पर कार्रवाई हो पाएगी, यह कहना मुश्किल है। यह कहने की ठोस वजह यह है कि महिला उत्पीड़न की शिकायतों पर सरकार ने मजबूरी में एक्शन तब लिया, जब विपक्ष ने इस मुद्दे को मजबूती से उछाला। अब देखना यह है कि प्रधानमंत्री मातृ वंदन योजना में कथित घपले पर सरकार का क्या रुख होता है?
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शादी ब्याह और गैस संकट
शादी – ब्याह का सीजन चल रहा है और गैस की किल्लत से बाराती – घराती दोनों परेशान हैं। हॉर्मूज संकट के बाद से गैस एक तो आसानी से मिल नहीं रही है, उस पर कमर्शियल सिलेंडर के दाम में भारी बढ़ोतरी हो गई है। घरेलु कनेक्शन पर 45 दिन की लिमिट से लोग परेशान हैं। अब खुद की रसोई का चूल्हा सुलगाएं या फिर शादियों में मेहमानों का खाना पकाएं, यह समझ नहीं पा रहे हैं । फॉरेस्ट के डिपो में जलाऊ लकड़ियां भी नहीं मिल रही हैं। धुआं रहित चूल्हा वाले कॉन्सेप्ट के चक्कर में लोग लकड़ी चूल्हा सुलगाना वैसे ही भूल चुके हैं।

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