साप्ताहिक व्यंग्य कॉलम शब्द बाण भाग – 157
12 अक्टूबर 2026
शैलेन्द्र ठाकुर । दंतेवाड़ा
मोबाइल फोबिया का असर
इस बार माँ दंतेश्वरी शक्तिपीठ की नवरात्रि में जो चीज सबसे ज्यादा चर्चा में है, वो है मोबाइल फोबिया यानि भय । जब सैकड़ों – हजारों की संख्या में हार्डकोर और सॉफ्टकोर नक्सली फुलफॉर्म में सक्रिय थे, तब भी बहादुर जवान आईईडी और लैंडमाइंस धमाकों से नहीं डरे, किसी अंदर वाले ने पर्व में खलल डालने का दुस्साहस तक नहीं किया।
लेकिन जब से केंद्र सरकार व राज्य सरकार ने मिलकर नक्सलवाद का खात्मा कर दिया, तब से हालात कुछ उल्टे होते दिख रहे हैं। मोबाइल फोन और रीलबाजी का भी भय बढ़ गया है। इधर, पहली बार मोबाइल बाहर रखवाने के प्रयोग को लेकर आम जनों व दर्शनार्थियों को व्यवहारिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे लोगों की नाराजगी बढ़ती जा रही है। ऑनलाइन और यूपीआई पेमेंट के अभ्यस्त हो चुके दर्शनार्थी न तो कन्या पूजन और भंडारा के लिए मंदिर के कोष में दान कर पा रहे हैं, और न ही अगली नवरात्रि के लिए रसीद का भुगतान कर सकते हैं। शक्तिपीठ द्वारा ढलवाए गये विशेष चांदी के सिक्के खरीदने की इच्छा रखने के बावजूद मन मसोसकर लौट रहे हैं। इससे मंदिर कोष को भी काफी आर्थिक नुकसान पहुंच रहा है। अब देखना यह है कि यह प्रयोग कितना सफल रहता है, और क्या गुल खिलाता है?
——
नाम बदलने पर यू टर्न
महत्वपूर्ण स्थलों का नाम बदलने की कोशिश को लेकर इन दिनों बवाल मचा हुआ है। राजधानी में तेलीबांधा चौक का नाम बदलने को लेकर इतना बवाल मचा कि खुद सीएम को आकर सफाई देने की नौबत आ गई। बस्तर में भी ऐसी ही स्थिति निर्मित हुई जब जगदलपुर के माड़िया चौक का नाम बदलकर विकसित भारत चौक करने को लेकर हल्ला उड़ा। यहां भी यू टर्न लेकर प्रशासन को सफाई देनी पड़ी। लोगों का मानना है कि नाम बदलने से ही अगर बदलाव संभव है, तो पिछली सरकार में सरकारी धन के करोड़ों फूंककर बनाए गए गोठानों का नाम भी बदला जाए, ताकि झाड़ियों से पट चुके इन गोठानों का फिर से उपयोग हो और जनता की गाढ़ी कमाई से लिए गये टैक्स की राशि का मान भी रह जाए।
——-
बोधघाट पर रार !
छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के नव नियुक्त प्रभारी ने आते ही दंतेवाड़ा जिले का दौरा किया और सीधे बोधघाट परियोजना प्रभावितों का दुःख – दर्द बांटने बारसूर इलाका पहुंच गए। प्रदेश प्रभारी ने अति उत्साह में यह तो कह दिया कि यह परियोजना पूरी तरह जन विरोधी है, और इसे किसी भी कीमत पर क्रियान्वित नहीं होने देंगे। साथ ही राहुल तक यह बात पहुंचाएंगे। अब भाजपाइयों को यह कहने का मौका मिल गया है कि परियोजना की रूपरेखा तो कांग्रेस के शासन काल में बनी थी और डिब्बा बंद परियोजनाy को शुरू करने की पहल भूपेश बघेल की कांग्रेस सरकार ने की थी, तो अपनी ही पार्टी की नीति के खिलाफ कैसे जा सकते हैं? यहां तक कि भाजपाई नेता मुख्यमंत्री रहते भूपेश सरकार द्वारा बोधघाट प्रोजेक्ट के गुणगान में छापी गई प्रचार पुस्तिकाओं की तस्वीर भी सोशल मीडिया पर पोस्ट करते दिखे। कुल मिलाकर बोधघाट पर सियासी जंग तेज होती दिख रही है।
—–
जांच की विश्वसनीयता पर संदेह
सुकमा जिले में पोटाकेबिन और आश्रम शालाओं में व्यवस्था सुधारने की मांग उठती रही, आर्थिक अनियमितताओं के आरोप लगते रहे, राजनीतिक पहुंच और कथित मासिक लेनदेन के चर्चे भी होते रहे, लेकिन शिक्षा विभाग की व्यवस्था पर कोई फर्क ही नहीं पड़ा। यहां नियुक्तियों में योग्यता और पारदर्शिता से ज्यादा सियासी एप्रोच का वजन दिखाई देता है। जिसकी सरकार, उसकी पसंद… जो भा गया, उसी के हिस्से मलाईदार पद। अधीक्षक-अधीक्षिकाओं की नियुक्तियों में राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों के बीच अब एक और हैरान करने वाला मामला सामने है। एक पोटाकेबिन की अधीक्षिका ने जिस बीआरसी पर आर्थिक अनियमितताओं के आरोप लगाए थे, उसी बीआरसी को एक छात्रा की मौत की जांच का जिम्मा सौंप दिया गया। छात्रा की मौत कोई मामूली घटना नहीं, बल्कि गंभीर जवाबदेही का विषय है। ऐसे में विवादों में घिरे अधिकारी को जांच की जिम्मेदारी सौंपना संदेह को जन्म देता है।
——
सीएम हेल्पलाइन खुद हेल्पलेस
आम जन की समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए सीएम हेल्पलाइन 1076 राज्य सरकार चला रही है। यह हेल्पलाइन भले ही अन्य मामलों मददगार साबित हो जाए, पर पीएमजीएसवाई विभाग से जुड़ी समस्याओं के मामले में खुद हेल्पलेस यानी बेबस दिखाई पड़ती है। ताजा उदाहरण दंतेवाड़ा जिले का है, जहां एक जागरूक नागरिक ने बिंजाम से झोड़िया बाड़म गांव के बीच जगह – जगह धंस चुकी सड़क की शिकायत करने की गरज से सीएम हेल्पलाइन का नंबर डायल किया। सामने वाले ने पूरी गंभीरता से नोट किया और शिकायत दर्ज कर संबंधित विभाग से निराकरण का भरोसा दिलाया। कुछ दिन बाद फरियादी ने हेल्पलाइन से आया यह मैसेज देखकर खुद का माथा पीट लिया, जिसमें कहा गया था कि आपकी समस्या का निराकरण कर दिया गया है, इसीलिए इस शिकायत को बंद किया जाता है। जबकि शिकायत के बावजूद सड़क के गड्ढों में एक तगाड़ी गिट्टी तक नहीं डाली गई है, फिर शिकायत का निराकरण कैसे हुआ?
——-
बीईओ के खिलाफ खुला मोर्चा
सुकमा जिले के छिंदगढ़ में पदस्थ बीईओ के खिलाफ शिक्षक संगठनों ने मोर्चा ही खोल दिया है। कार्यप्रणाली और शिक्षकों के साथ कथित व्यवहार को लेकर संघ ने कलेक्टर ज्ञापन सौंपकर बीईओ को पद से हटाने की मांग की है। संगठन का आरोप है कि उक्त बीईओ न सिर्फ़ शिक्षकों को परेशान करते हैं, बल्कि कई मामलों में नियमों के विपरीत कार्रवाई करते६ हैं। गंभीर बीमारी से पीड़ित शिक्षकों को चिकित्सा प्रमाण पत्र प्रस्तुत किए जाने के बावजूद वेतन आहरण में परेशान करने, आकस्मिक, अर्जित, मातृत्व एवं संतान पालन अवकाश स्वीकृत नहीं करने, बदसलूकी सहित कई आरोप भी लगाए हैं। शिक्षक संघ ने बीईओ को पद से नहीं हटाने आंदोलन का अल्टीमेटम भी दिया है। अब देखना यह है कि विभाग और प्रशासन क्या रुख अपनाते हैं। वैसे, इस मलाईदार कुर्सी तक वही पहुंच पाता है, जो घाट – घाट का पानी पीया हुआ होता है। ऐसे में शिक्षक अपने मुहिम में सफल हो पाते हैं या बीईओ, यह कहना अभी मुश्किल है।
——-
पीएमजीएसवाई में झोलझाल
बीजापुर जिले में पीएमजीएसवाई के 4 अफसर थोक के भाव में सस्पेंड हो गए, तब लोगों को पता चला कि बिना सड़क बने ही भुगतान हो गया। वरना इस विभाग में वर्षों से जो झोल झाल चल रहा है, उसकी शिकायतों पर कोई सुनवाई ही नहीं होती। पूरे बस्तर संभाग में इस विभाग का बुरा हाल है। सड़कें दशकों तक अधूरी पड़ी रहती हैं, और मेंटेनेंस के नाम पर अफसर चांदी काटते रहते हैं। दंतेवाड़ा में तो हाल ही में एक अधूरी सड़क को लेकर गांव की सरपंच ने तो थक हारकर माँ दंतेश्वरी को चिट्ठी लिख डाली। दानपेटी खुलने पर इसका खुलासा हुआ। सरकार की इतनी किरकिरी करवाने के बाद भी विभाग के अफसर का बाल बाँका नहीं हुआ।
——
जागी उम्मीदें…
इस बार शारदीय नवरात्रि पर माता दंतेश्वरी के दर्शन करने सीएम विष्णुदेव साय के आगमन को लेकर संशय कायम है। अब तक कार्यक्रम तय नहीं हुआ। लोग तो यह उम्मीद जताए बैठे हैं कि कम से कम इस बार भानुमती का पिटारा खुलेगा और जिले वासियों को कुछ अच्छी सौगात मिलेगी। पिछले साल आई विनाशकारी बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा से जिला अब तक उबरा नहीं है। कई बड़े पुल – पुलियों की मंजूरी और शासकीय कृषि महाविद्यालय खुलने की घोषणा का इंतजार जिले को है।
——-
