रोम जल रहा था और नीरो बंशी बजा रहा था.. (शब्द बाण -155)

रोम जल रहा था और नीरो बंशी बजा रहा था.. (शब्द बाण -155)

साप्ताहिक व्यंग्य कॉलम 'शब्द बाण' भाग - 155 27 सितंबर 2026 शैलेन्द्र ठाकुर । दंतेवाड़ा रोम जल रहा था और नीरो बंशी बजा रहा था.....