नाक कटवाने पर उतारू हुआ विभाग (शब्द बाण -137)

नाक कटवाने पर उतारू हुआ विभाग (शब्द बाण -137)

साप्ताहिक व्यंग्य कॉलम ‘शब्द – बाण ‘ भाग – 137

25 मई 2026

शैलेन्द्र ठाकुर । दंतेवाड़ा

नाक कटवाने पर आमादा विभाग

दक्षिण बस्तर में महिला व बाल विकास विभाग अपने कारनामों की वजह से सरकार की नाक सूर्पणखा की तरह कटवाने पर आमादा है। यहां महिला उत्पीड़न के आरोप में जिस अफसर को सस्पेंड किया गया, उसने अपना चेंबर ही नहीं छोड़ा है। बदले में जिसे प्रभार दिया गया, उस अफसर ने भी वित्तीय अधिकार लेने में आनाकानी की। चरण पादुका कुर्सी पर रखकर बाजू वाली सीट से काम करने का यह आदर्श विचार विभाग के सिस्टम पर भारी पड़ गया है। विभागीय कर्मचारी अपने भत्तों के लिए तरसने लगे, तो मामला बिगड़ता देख अब दूसरे अधिकारी को यह अधिकार सौंपा गया है। विभाग इस जिले में वैसे भी पीएम मातृ वंदना योजना से लेकर संविदा भर्ती प्रक्रिया तक में कई अनियमितताओं के आरोप झेल रहा है। हैरानी की बात यह है कि इस विभाग में हाल ही में राज्य स्तर पर एक जंबो तबादला सूची निकली, लेकिन इसमें दंतेवाड़ा के किसी अफसर का नाम नहीं आया। जिससे यह पहेली बूझ पाना कठिन हो गया है कि उक्त अफसर को सरकार अधिकृत रूप से निलंबित मान भी रही है या नहीं? निलंबन को सत्य माना जाए तो बड़ा सवाल यह है कि चेंबर में अब भी अफसर के नाम वाली तख्ती क्यों दिख रही है? अफसर अटैचमेंट वाली जगह जगदलपुर की जगह यहां कैसे बैठ रहे हैं? अगर निलंबन निरस्त हो गया हो तो प्रभार दूसरे अफसर को सौंपने की नौबत क्यों आई? ये बड़े यक्ष प्रश्न अनुत्तरित हैं। ऐसा ही हाल बना रहा तो जल्द ही यह गुत्थी सुलझाने सोनी टीवी चैनल वाले सीआईडी के एसीपी प्रद्युम्न और इंस्पेक्टर दया को ही को बुलाने की जरूरत पड़ जाएगी।
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मर्ज बढ़ता गया , ज्यों ज्यों दवा की

पेट्रोल – डीजल की आपूर्ति और बिक्री तो लगभग सामान्य हो गई है, लेकिन बस्तर में किसानों के लिए डीजल संकट गहरा गया है। दरअसल, डिब्बों में पेट्रोल – डीजल नहीं देने का फरमान सरकार ने जारी किया है, जिससे खेतों की जुताई और मरम्मत कार्यों में लगी हुई ट्रैक्टर जैसी मशीनों के लिए डीजल मिलना मुश्किल हो गया है।
सरकार ने पेट्रोल-डीजल की काला बाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए भले ही यह उपाय किया हो, लेकिन इसके साइड इफेक्ट उससे कहीं ज्यादा दिख रहे हैं। अब किसान आंदोलित होने लगे हैं। मर्ज बढ़ता ही गया, ज्यों – ज्यों दवा की जैसी स्थिति बन गई है।
दरअसल, काम छोड़कर दोबारा पेट्रोल पंप तक ट्रैक्टर जाना अव्यवहारिक है, खासकर कम माइलेज वाली मशीनों को लेकर जाना किसानों को महंगा पड़ रहा है। बस्तर जैसे विषम भौगोलिक स्थिति वाले इलाके में पेट्रोल पंपों की संख्या वैसे भी कम है। पंपों की दूरी भी ज्यादा है । मसलन, बीजापुर जिले को 2 – 2 विधायक देने वाले ब्लॉक मुख्यालय भैरमगढ़ में सरकार आज तक एक भी पेट्रोल पंप नहीं खुलवा सकी है। ऐसी जगहों पर डिब्बा और बोतल वाले अघोषित पंप ही काम आते हैं।
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अब सेवा डेरा से उम्मीद ..
कभी नक्सलियों से निपटने के लिए समूचे बस्तर में स्थापित किए गए फोर्स के कैंप अब सेवा डेरा कहलायेंगे। नक्सलमुक्ति की डेडलाइन खत्म होने के बाद केंद्रीय गृहमंत्री ने इसका ऐलान कर सेवा डेरा कॉन्सेप्ट  का शुभारंभ भी कर दिया है। अब फोर्स के कैंप में एक ही छत के नीचे ढेर सारी सुविधाएं मिलेंगी। अविभाजित मध्यप्रदेश के दौरान पुलिस ‘देश भक्ति जन सेवा ‘ के ध्येय वाक्य के साथ काम करती आ रही थी। एमपी से अलग होकर छत्तीसगढ़ राज्य बना तो पुलिस ने ‘परित्राणाय साधुनाम ‘ को अपना नया ध्येय वाक्य बना लिया। सेवा डेरा में वास्तव में ईमानदारी से काम हुआ तो जनता को देश भक्ति और जन सेवा के साथ ही साधुओं के परित्राण की सुविधा यकीनन मिल पाएगी और लोगों का भरोसा लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति यकीनन और मजबूत होगा। यह तभी संभव होगा, जब फरियादी और आरोपी से आदतन प्रति एफआईआर ‘सेवा – शुल्क ‘ वसूलने वाले अमले और राजस्व समेत दीगर विभागों के ऐसे होनहारों को नशामुक्ति केंद्र भेजकर इस व्यसन से मुक्त करवाया जाए।
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सुरा प्रेमियों की दिक्कत

दंतेवाड़ा जिले में मदिरा प्रेमियों को पीएससी से भी कठिन परीक्षा पास कर दुकान तक पहुंचना पड़ता है। हालांकि यह परीक्षा लिखित नहीं बल्कि फिजिकल ज्यादा होती है। गड्ढे वाली सड़कों से होकर सुरक्षित दुकान तक पहुंचना, फिर सुरक्षित मेन रोड तक वापस लौटना किसी चुनौती से कम नहीं होता है। खासकर तब, जब वो दुकान के आस – पास ही पैग गटक कर वापसी कर रहे होते हैं । करोड़ों का व्यवसाय करने वाली इन दुकानों की तरफ से सड़कों के मेंटेनेंस पर एक ढेला भी खर्च नहीं किया जाता है। इधर, कमाई को लेकर सौतिया डाह के चलते पीडब्ल्यूडी वाले अपनी ही इन सड़कों की तरफ आंख उठाकर भी नहीं देखते हैं। इसके चक्कर में राज्य की आर्थिक व्यवस्था चलाने वाले ‘ इकोनॉमी – वारियर्स ‘ सुरा प्रेमियों को अपनी हड्डियां तुड़वाने की नौबत आ रही है।
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सीएम का इंतजार
इस बार सुशासन तिहार यानी लोक सुराज अभियान में राज्य के मुखिया दक्षिण व पश्चिम बस्तर के किसी जिले में अब तक नहीं पहुंचे हैं। उनका उड़न खटोला औचक प्रवास पर इधर नहीं उतरा है। इस बीच मानसून आगमन की तारीख भी नजदीक आती जा रही है। प्री मानसून बारिश की हलचल शुरू होने पर ख़राब मौसम में उड़ान वैसे ही कैंसिल हो जाती है। ऐसे में इस इलाके में मौजूदा सीजन में सीएम के पहुंचकर किसी गांव में चौपाल लगाने की संभावनाएं क्षीण होती जा रही हैं। नक्सलमुक्त घोषित होने के बाद तेजी से विकास के आने की बाट जोह रहे दक्षिण बस्तर के लिए यह स्थिति थोड़ी निराशाजनक है।

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दिल्ली अब भी दूर
यात्री ट्रेन सुविधा के मामले में एक बार फिर बस्तर के साथ छलावा हुआ है। दिल्ली से बस्तर तक स्पेशल ट्रेन चलाने की बात हुई और 21 मई को स्पेशल ट्रेन की तारीख तय की गई। लोगों को उम्मीद बंधी कि यह स्पेशल ट्रेन भी अंततः नियमित हो जाएगी, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। दरअसल, दिल्ली के निजामुद्दीन से बस्तर तक स्पेशल ट्रेन आई जरूर, लेकिन आम यात्रियों के लिए टिकट कटवाने की कोई व्यवस्था नहीं हुई। अब विपक्षियों को यह कहने का मौका मिल गया है कि एक बड़े प्रदर्शन में शामिल होने दिल्ली जाने वाले लोगों के लिए यह स्पेशल ट्रेन चलाई गई थी। खैर, विरोध – समर्थन की बात छोड़ भी दें, तो बस्तर वासियों के नसीब में दिल्ली तक डायरेक्ट ट्रेन की सुविधा लिखी है या अब भी दिल्ली दूर है, यह देखने वाली बात होगी।

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हंता वायरस का खौफ
इन दिनों देश-विदेश की मीडिया में कोविड से भी ज्यादा जानलेवा हंता वायरस को लेकर चर्चा खूब है, लेकिन भारत की जनता इस हंता वायरस से ज्यादा ‘पति – हंता ‘ वायरस से भयभीत है। नीले ड्रम को देखते ही लोग दहशत में आने लगे हैं। राजा रघुवंशी प्रकरण के बाद से तो हालात और भी डरावने हो गए हैं। वैसे, दक्षिण बस्तर में एक नई तरह का मामला सामने आया है, जहां सौतिया डाह के चलते एक जवान की दूसरी पत्नी ने पति की लिव इन पार्टनर प्रेमिका की हत्या करवा दी, वह भी किलर को सुपारी देकर। इस ग्रामीण इलाके में सुपारी किलिंग का इस तरह का यह पहला मामला बताया जाता है, वैसे, कुछ दिन पहले भी राजधानी क्षेत्र के एक जिले में एक महिला की हत्या पति की प्रेयसी ने कर दी थी। यानी यह माना जा सकता है कि पुरुष वर्ग के सिर पर से ‘पति हंता ‘ वायरस का डायरेक्ट खतरा फिलहाल तो टल गया है, लेकिन पूरी तरह से नहीं।

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