टाइगर अभी ज़िंदा है… शब्द बाण – 153

टाइगर अभी ज़िंदा है… शब्द बाण – 153

साप्ताहिक व्यंग्य कॉलम ‘शब्द बाण ‘ भाग – 153
13 सितंबर 2026

शैलेन्द्र ठाकुर @ दंतेवाड़ा

नया नौ दिन.. पुराना सौ दिन

आजकल बस्तर में सरकार और सार्वजनिक प्रतिष्ठानों को रिटायर्ड कर्मियों से कुछ ज्यादा ही मोह हो गया है, ऐसा लगता है। नया नौ दिन पुराना सौ दिन, खांसी के लिए ग्लाइकोडिन .. वाला जिंगल कभी दूरदर्शन पर छाया रहता था, उसका असर दशकों बाद भी नहीं गया है।
लौह अयस्क खनन में लगी एनएमडीसी में रिटायर्ड कर्मियों की वापसी को लेकर मचा बवाल थमा भी नहीं था कि अब बस्तर संभाग के नगरीय निकायों में भी रिटायर्ड कर्मियों की वापसी को लेकर असंतोष के स्वर मुखर होने लगे हैं। बेरोजगारों का सवाल है कि रोजगार की ऐसी ही कमी छाई हुई है, फिर नई भर्ती की जगह रिटायर्ड लोगों की वापसी क्यों?
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एक्सीडेंटल से मेंटल हॉस्पिटल तक

स्वास्थ्य मंत्री ने जगदलपुर आकर 100 बिस्तर मेंटल हॉस्पिटल खोलने की घोषणा की और मेकाज डिमरापाल में पैरामेडिकल कोर्स शुरू करने का ऐलान करते यह भी कहा कि पैरामेडिकल कोर्स करते ही नौकरी भी लग जाएगी। लेकिन दंतेवाड़ा में नए खुले मेडिकल कॉलेज की भर्तियां जिस तरह गुपचुप तरीके से डिमरापाल और रायपुर से हो रही हैं, और लोग सीधे ज्वाइनिंग लेटर लेकर दंतेवाड़ा पहुंच रहे हैं, उससे दंतेवाड़ा के लोगों का भरोसा जीत पाना मुश्किल लगता है।
वैसे भी पिछले कुछ स्वास्थ्य मंत्रियों की घोषणा को लेकर बस्तर के लोगों का अनुभव अब तक ठीक नहीं रहा है। पिछली सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहते टीएस बाबा ने दंतेवाड़ा जिला हॉस्पिटल को 100 से 200 बिस्तर में अपग्रेड करने की घोषणा की थी, लेकिन सरकार चली गई, फिर भी जिला हॉस्पिटल 100 बिस्तर के सेटअप पर ही चल रहा है, मरीज भले ही ढाई – तीन गुना भर्ती रहते हैं।
कहीं ऐसा ही हाल मेकाज में सड़क हादसों के घायलों के लिए शुरू हुए ट्रामा यूनिट का न हो जाए। ड्यूटी के टाइम भी जगदलपुर के निजी क्लीनिक में बैठे रहकर ऑपरेट करने वाले ज्यादातर सीनियर डॉक्टरों के भरोसे ट्रामा यूनिट कैसे चल पाएगा, ये बड़ा सवाल है।
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बुजुर्ग मरीज को लौटा दी जवानी

नेता से लेकर अभिनेता लोग भले ही एआई की मदद से 80 के दशक की तस्वीरें अपलोड कर खुश हो रहे हों, लेकिन दक्षिण बस्तर के सुकमा जिला हॉस्पिटल ने इससे भी एक कदम6 आगे बढ़कर कमाल कर दिया। हॉस्पिटल के अटल आरोग्य लैब ने रिपोर्ट में 80 साल के बुजुर्ग मरीज की न सिर्फ उम्र घटाकर 30 साल कर दिया, बल्कि पुरुष से महिला भी बना दिया। यानी उम्र के साथ लिंग परिवर्तन भी। है न कमाल की बात! हॉस्पिटल में पहले तो हमर लैब के नाम पर करोड़ों का सेटअप बिठाया गया था, मशीनों का ठीक से उपयोग हुआ भी नहीं था कि वहीं अब अटल आरोग्य लैब के नाम से प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को सेवा हैंडओवर कर दी गई।
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मुर्गी पहले आई या अंडा ?
राज्य के डिप्टी सीएम व पीडब्ल्यूडी मिनिस्टर ने दक्षिण बस्तर प्रवास पर जो कहा, उससे अफसर और ठेकेदार सिर खुजाने पर मजबूर हो गए। मिनिस्टर ने समीक्षा बैठक में कड़ी हिदायत देते कहा कि नक्सलवाद के नाम पर बहानेबाजी अब नहीं चलेगी। कुछ ऐसा कर दिखायें कि अफसर ठेकेदार के पीछे न दौड़ें, बल्कि ठेकेदार अफसर के पीछे भागें। अब ठेकेदार यही सोचने लगे हैं कि काम करने के बाद भुगतान के लिए अफसरों के पीछे ठेकेदार पहले से भागते ही फिर रहे हैं, फिर अब ये कौन सी नई बात है? ठेकेदार और अफसरों का एक दूसरे के पीछे भागना मुर्गी पहले आई या अंडा, जैसी कहावत से कम तो नहीं।
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आखिर कब बनेगी वाटरप्रूफ सड़क ?
राज्य के पीडब्ल्यूडी मिनिस्टर को दंतेवाड़ा में पत्रकारों ने घेरा। गड्ढा मुक्त सड़कों वाला राज्य बनाने के उनके ही आदेश की नाफरमानी का सवाल पूछा, तो मंत्री जी ने साफ कह दिया कि बरसात में सड़कें खराब होना कोई नई बात नहीं। जब बरसात खत्म हो जाएगी तो सड़कें ठीक कर ली जाएगी। मंत्रीजी का यह जवाब पत्रकारों के गले नहीं उतरा। खैर, जब राज्य में चंद्रमा की सतह की तरह के गड्ढों वाली स्पेस टेक्नोलॉजी से निर्मित सड़कों का बोलबाला है, तो फिर वाटरप्रूफ सड़कें बनाने का सवाल ही नहीं उठता। कुछ दिन पहले एनएच के अफसरों ने तो सड़कों की रिपेयर के मामले में हाथ खड़े करते साफ कह दिया था कि मानसून की विदाई के बाद ही डामर के हॉट मिक्सिंग प्लांट शुरू हो पाते हैं।
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टाइगर अभी जिंदा है..!!
पिछले महीने दक्षिण – पश्चिम बस्तर में शिकारियों के कब्जे से करीब आधा दर्जन बाघों की खाल बरामद होने के बाद यह कयास लगाए जाने लगे कि आईटीआर यानि इंद्रावती टाइगर रिजर्व टाइगर फ्री हो गया है। इससे पहले कि वन विभाग इसका खंडन करता, बाघ खुद निकलकर बताने लगे कि टाइगर अभी जिंदा है। पहले फरसपाल – मासोड़ी में शावक के साथ सड़क पार करती बाघिन दिखी। फिर कुम्हाररास चन्देनार इलाके में बाघिन दिखी और सुकमा के कुछ इलाकों में भी। बात इससे भी नहीं बनी, तो वन मंत्री महोदय के गृह क्षेत्र बस्तर के एक गांव मावलीगुड़ा में भी बाघ जैसा कोई वन्य जीव घुस आया। वन विभाग को एडवाइजरी जारी कर लोगों को सतर्क रहने की चेतावनी देना पड़ गया।
खैर, अविश्वास के युग में जब पेंशनरों को हर साल लाइफ़ सर्टिफिकेट देकर खुद के जीवित होने का प्रमाण बताना पड़ता हो, तब बाघ – बाघिन भला किस खेत की मूली हैं। उन्हें भी सशरीर प्रकट होकर बताना पड़ रहा है कि टाइगर अभी जिंदा है…!!
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बाघ नहीं बच रहे, शेर भी मैदान में आ गए !!

एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते उपयोग ने लोगों की नाक में दम करना शुरू कर दिया है। बड़े बुजुर्ग भी 80 के दशक की फोटो जनरेट करवाकर मजे से सोशल मीडिया में शेयर कर रहे हैं। कई ऐसे भी हैं, जिनका जन्म ही 80 के दशक में नहीं हुआ था, वो भी उस दौर की जवानी वाली फोटो बनवा रहे हैं। नक्सलवाद के चलते पिछड़े रह गए सुकमा जिले से आई कुछ तस्वीरों ने तो हद ही पार दी। किसी ने शेर यानी लायन के शावक की खूंटे से बंधी हुई और पास में बेखौफ मुस्कुराते ग्रामीण की तस्वीर सोशल मीडिया पर जारी कर दी। साथ ही वाहन की हेडलाइट की रौशनी में सामने दिख रही शेरनी की तस्वीर भी सोशल मीडिया पर तैरती दिखी, जिसके बारे में दावा किया गया कि सुकमा जिले के एक जंगली रास्ते की तस्वीर है। बात जब वन विभाग के अफसरों तक पहुंची तो वो भी सिर खुजाने लगे कि बस्तर तो क्या, पूरे छत्तीसगढ़ में शेर – शेरनी नहीं पाए जाते हैं। टाइगर यानी बाघ जरूर यहां मिलते हैं। फिर यहां शेरनी कहां से आ गई? अगर ऐसा है तो जनरल नॉलेज बुक अपडेट करना पड़ सकता है। खैर, यह तो फेक तस्वीर निकली। वरना ऐसी नौबत आ ही जाती।
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