साप्ताहिक व्यंग्य कॉलम ‘शब्द – बाण‘ भाग -150
दिनांक 23 अगस्त 2026
शैलेन्द्र ठाकुर। दंतेवाड़ा
मंत्री नहीं, महामंत्री का डर !!
पीडब्ल्यूडी के अफसर सरकार के मंत्री से नहीं, बल्कि भाजपा संगठन के महामंत्री की नाराजगी से डरते हैं, इस बात का हाल ही में पता चला। दरअसल, छत्तीसगढ़ के उत्तरी छोर पर अंबिकापुर जिले में भाजपा प्रदेश संगठन महामंत्री की कार का पहिया कर्ण के रथ की तरह खराब सड़क पर गड्ढे में धंस गया। कार हिचकोले खाने लगी, तो उन्होंने सरकार के मंत्रियों पर आँखें तरेरी। उनकी नतीजा यह हुआ कि सरकार, खासकर पीडब्ल्यूडी ने आनन – फानन में एनएच सड़क मरम्मत का काम शुरू कर दिया। वहीं, सीएम ने उस इलाके में सड़कों के कई प्रोजेक्ट की तत्काल मंजूरी दे दी। लेकिन बस्तर, खासकर दक्षिण बस्तर के लोग खराब सड़कों के मामले में उतने खुशकिस्मत नहीं हैं। इधर मंत्री तो क्या, महामंत्री भी दौरा कर जाएं, तो भी पीडब्ल्यूडी और पीएमजीएसवाई अफसरों के कान पर जूं तक नहीं रेंगती। बस, अपना ट्रांसफर रुकवाकर जमे रहने में उनकी दिलचस्पी ज्यादा रहती है। हाल ही में जिन सड़कों से होकर डिप्टी सीएम व गृहमंत्री जिले के प्रभारी मंत्री के साथ बाइक पर गुजरे, उन सड़कों को किसी तरह गिट्टी और डस्ट डालकर छिपाया गया था। इस विजय यात्रा के बाद सड़कों की हालत और भी ज्यादा खराब होती जा रही है। 
————-
हेलीकॉप्टर का छूटा साथ
स्वतंत्रता दिवस पर पहली बार बस्तर के कई जिलों में बिना हेलीकॉप्टर की सवारी किए मुख्य अतिथि पहुंचे। नक्सलमुक्त होने की घोषणा का ही असर था कि जिला स्तरीय समारोहों में मुख्य अतिथि घोषित वीवीआईपी आसानी से सड़क मार्ग से पहुंच सके। इसके पहले इन जगहों तक वीवीआईपी का सड़क मार्ग से जाना सुरक्षित नहीं समझा जाता था। दोनों राष्ट्रीय पर्व 15 अगस्त और 26 जनवरी के एक – दो दिन पहले सुरक्षागत कारणों से हेलीकॉप्टरों से थोक में चीफ गेस्ट इन जिलों तक पहुंचाए जाते थे, ताकि राष्ट्रीय पर्व वाले दिन की सुबह निर्विघ्न कार्यक्रम संपन्न हो सके। कार्यक्रम के बाद हेलीकॉप्टरों से ही वापस भी लाया जाता था। इस पर काफी जेट फ्यूल खर्च करना पड़ता था। खैर, अब यह बदलाव हवा में उड़ते आ रहे वीवीआईपी को जमीन से ज्यादा जोड़ पाएगा, यह उम्मीद जताई जा रही है।
————
नए – नए बुलेट राजा
डिप्टी सीएम व गृहमंत्री विजय शर्मा ने बस्तर के बीहड़ों में बाइक पर तिरंगा यात्रा निकालने का साहसिक कदम उठाया, तो बाइक शोरूम में अचानक बुलेट की बिक्री बढ़ गई। गृहमंत्री और वन मंत्री का सान्निध्य पाने और नजदीकी बढ़ाने युवा नेताओं में होड़ लगी हुई थी। आत्मनिर्भर टाइप युवाओं ने तो खुद नई बुलेट बाइक कसवा ली। बाकी ने अपने पेरेंट्स की जेब ढीली करते हुए गाड़ी उठवाई। शोरूम में बाइक के साथ हेलमेट भी खूब बिकी। खैर, मंत्री की विजय यात्रा के बहाने युवाओं को बुलेट राजा बनने का बहाना मिल गया। पहले जिन इलाकों में नक्सली – पुलिस की बंदूकों से बुलेट चलती थी, वहां सड़कों पर बुलेट दौड़ा आए।
———-
आखिर कौन कर रहा आगजनी?
नक्सलवाद की ऑफिशियल ढंग से विदाई तो हो चुकी है और पुलिस के साथ पब्लिक को भी काफी राहत मिली है, लेकिन दक्षिण बस्तर में पिछले कुछ दिनों से मशीनों और मोबाइल टावर में हुई आगजनी ने पुलिस की टेंशन बढ़ा दी है। आगजनी का स्टाइल ठीक नक्सलियों जैसा ही है, लेकिन किसी भी तरह के नक्सली पर्चे – पोस्टर नहीं मिलने से रहस्य और गहराता जा रहा है। अगर सारे नक्सली सरेंडर कर गए या मारे जा चुके, तो फिर कौन ऐसी वारदातों को अंजाम दे रहा है? सरकार के सामने धर्मसंकट तो यह भी है कि नक्सलमुक्त घोषित होने के बाद अगर कोई नक्सल वारदात हुई भी, तो उसे स्वीकारें कैसे?
———
आईना दिखाने की तैयारी …
राज्य सरकार और जिला प्रशासन ने नक्सलवाद चरम पर रहने के दौरान ही अरनपुर – जगरगुंडा और बारसूर – नारायणपुर मार्ग को नक्सल कब्ज़े से मुक्त करवाकर सड़क खुलवाने का लगभग असंभव कार्य कर दिखाया, लेकिन दंतेवाड़ा जिला मुख्यालय के कतियाररास साप्ताहिक बाजार से डेगलरास गांव तक की सिर्फ 4 किमी लंबी सड़क को आज तक पूरा नहीं करवा सके। पीएमजीएसवाय विभाग ने 21 साल पहले इस सड़क का काम शुरू करवाया था, जो अब तक डामरीकृत नहीं हो सकी है। नक्सल भय के नाम से कई बार ठेकेदार बदले, पर काम पूरा नहीं हुआ। परेशान ग्रामीणों ने अब चक्काजाम और धरना – प्रदर्शन का अल्टीमेटम दिया है और इस पर भी काम नहीं होने पर चंदा जुटाकर सड़क डामरीकरण की योजना बना रहे हैं। ऐसा हुआ तो पीएमजीएसवाई के साथ ही प्रशासन और सरकार की नाक कटते देर नहीं लगेगी। कुछ दिन पहले बालपेट ग्राम पंचायत के ग्रामीण युवाओं ने चंदा से राशि जुटाई और जन सहयोग से सड़क मरम्मत कर आईना दिखाया था।
——–
ट्रैक्टर पर पुलिसिंग ..
धुर नक्सलवाद प्रभावित जिले की इमेज से बाहर निकलता सुकमा जिला इन दिनों सुर्खियां बटोर रहा है। जिले के पुलिस कप्तान खुले ट्रैक्टर पर सवार होकर उस अंदरूनी गांव तक पहुंचते दिखे, जिस तरफ कभी फोर्स गश्त पर निकलती भी थी, तो टीम के सभी जवानों के सकुशल लौटने पर संदेह रहता था। बुलेटप्रूफ बख्तरबंद गाड़ियों और माइनप्रूफ व्हीकल में सवार होकर भी जवाब खुद को सुरक्षित नहीं मान सकते थे। सशस्त्र नक्सलवाद के खात्मे की डेडलाइन समाप्त होने के बाद यह सुखद बदलाव तो आया है, लेकिन सरकार इस बदले हुए माहौल में इन अंदरूनी गांवों तक कितनी तेजी से विकास पहुंचा कर ग्रामीणों का भरोसा जीत सकती है, यह देखने वाली बात होगी।
——–
शौचालय में पोस्ट ऑफिस !!
ज्यादातर सरकारी शौचालयों की स्थिति ऐसी होती है कि बनने के बाद भी इस्तेमाल लायक नहीं रहती। पानी और सफाई की व्यवस्था रहती नहीं है। सेनेटरी आइटम्स भी सस्ते और कामचलाऊ होते हैं। ऐसे में शौचालय सिर्फ निर्माण एजेंसी के लिए काम के भुगतान तक ही मामला सीमित रहता है। फिर उसके बाद भले ही हमेशा शौचालय पर ताला लगा रहे। कोंडागांव जिले में एक ऐसा ही सार्वजनिक शौचालय खाली मिला, तो डाक विभाग ने उसमें पोस्ट ऑफिस ही शुरू कर दिया। अब मामला उजागर होने पर लीपा-पोती शुरू हो गई है।
——
चलते – चलते..
टीईटी पास करने की अनिवार्यता के विरोध में शिक्षक संगठन फिर से आंदोलित होते दिख रहे हैं। बच्चों को पढ़ाते आधी उम्र निकल जाने के बाद फिर परीक्षा की कसौटी से गुजरना उन्हें नागवार साबित हो रहा है। सरकार ने डीएड, बीएड की अनिवार्यता के समय इग्नू से अनुबंध कर बीच का रास्ता निकाल लिया था, लेकिन इस बार ऐसी कोई कोशिश होती नहीं दिख रही है। जिन शिक्षकों ने पढ़ाकर कई डॉक्टर, इंजीनियर्स, वकील तैयार कर लिया, वो ही अब खुद की नौकरी बचाने की जद्दोजहद में हैं। शिक्षक कहने लगे हैं कि महाभारत काल के गुरु द्रोणाचार्य, देश में जिनके नाम से शिक्षक दिवस मनाया जाता है, वे डॉ एस राधाकृष्णन भी आज के जमाने में होते तो टेट परीक्षा दिलाने को मजबूर कर दिए जाते।
————–

🙏🏼🙏🏼🙏🏼बेहतरीन सर जी