साप्ताहिक व्यंग्य कॉलम शब्द बाण भाग-97
17 अगस्त 2025
शैलेन्द्र ठाकुर । दंतेवाड़ा
फिर जागी लाल बत्ती की उम्मीद
यह चर्चा तेजी से वायरल हो रही है कि विष्णुदेव साय मंत्री मंडल विस्तार में अब दंतेवाड़ा को भी जगह मिलने जा रही है। अब यह अफवाह है या सच, लेकिन दंतेवाड़ा की दावेदारी व उम्मीदों की ठोस वजह भी है। भाजपा ने अब तक 4 पारी में एक बार भी दंतेवाड़ा को राज्य मंत्रिमंडल में जगह नहीं दी। जबकि कांग्रेस की भूपेश सरकार ने सुकमा को प्रतिनिधित्व देकर इस मामले में बाजी मार ली थी। इसके पहले दंतेवाड़ा से कद्दावर नेता स्व. महेंद्र कर्मा को भी अविभाजित मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़ में मंत्री बनाया गया था। खैर, जो भी हो, नई चर्चा से विरोधी खेमे में बेचैनी है, तो समर्थकों के मन में दूसरे के बाद तीसरा लड्डू फूटता जा रहा है।
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चोर-पुलिस का खेल
नक्सलवाद जैसी समस्या पर भले ही पुलिस ने लगभग काबू पा ही लिया हो, लेकिन दंतेवाड़ा में चोरों ने पुलिस की नाक में दम कर रखा है। आरईएस-हुडको कॉलोनी, जीएडी कॉलोनी जैसे इलाकों में मिली सफलता से उत्साहित चोरों ने हाई स्कूल कॉलोनी में भी अपनी सफलता के झंडे गाड़े। पूर्व डीईओ के सूने घर का ताला ऐसे समय में तोड़ा, जब सामने मैदान में राष्ट्रीय पर्व की तैयारी चल रही थी। चोरों के बुलंद हौसले को देखकर जनमानस में यह धारणा बनने लगी है कि नक्सल मामलों में भले ही पुलिस स्पेशलिस्ट बन चुकी हो, चोरी-नकबजनी जैसे परंपरागत केस साल्व करने की कला पुलिस कर्मी भूलते जा रहे हैं। वैसे, मुख्यालय में पुलिसिंग करना इतना आसान भी नहीं होता। अतिथि सत्कार से लेकर तमाम तरह का वर्कलोड पुलिस पर रहता है।
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कब बहुरेंगे पीजी कॉलेज के दिन?
संभाग मुख्यालय जगदलपुर के पीजी कॉलेज धरमपुरा ने अविभाजित मध्यप्रदेश और वर्तमान छत्तीसगढ़ को कई बड़े नेता-मंत्री-विधायक-आईएएस अफसर दिया। लेकिन अब गौरवशाली अतीत वाले इस पुराने कॉलेज के भवनों की स्थिति दयनीय है। साइंस बिल्डिंग की दीवारों में दरार देखकर लगता है कि कोई भूकम्प इस इलाके में आया होगा। यह भी अजब संयोग है कि वर्तमान में विपक्षी दल कांग्रेस और सत्ताधारी भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष दोनों ही इसी कॉलेज से पढ़कर निकले हुए हैं। ऐसे में उम्मीद की जा सकती है कि इस कॉलेज के दिन बहुरेंगे।
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अभयदान पा गए शिक्षक
कहते हैं कि बीजापुर जिले में जो हो जाए, वो भी कम है। अतिशेष शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण के बाद भी बीजापुर जिले के अधिकांश शिक्षक पुरानी जगह पर ही जमे हुए हैं। संभाग स्तर पर हुई काउंसिलिंग भी बेअसर साबित हुई है। दरअसल, न्यूटन के “जड़त्व के नियम” के अनुसार जो चीज स्थिर रहती है, तो वो तब तक स्थिर बनी हुई रहना चाहती है, जब तक कि कोई बल बाहर से आरोपित न किया जाए। खबर है कि बाहरी बल आरोपित न हो, इसके लिए अपने-अपने बीईओ-बीआरसी को ‘मैनेज’ भी कर लिया है। अब विभाग प्रमुख यानी डीईओ स्वयं तबादले के बावजूद यहां से टलने के मूड में नहीं हैं, सो, उनके अधीनस्थ शिक्षकों को भी मौका मिल ही गया है। अब जिला शिक्षा अधिकारी उनके खिलाफ निलंबन की सिफारिश भी नहीं कर पा रहे हैं। वैसे भी, बीजापुर में एक पद पर दो-दो डीईओ की पोस्टिंग का मामला अब तक सुलझा नहीं है।
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संविदा इंजीनियर का जलवा
कलियुग में कुबेर का खजाना साबित हो रहे डीएमएफ फंड की निगहबानी के लिए कुछ इंतजाम सरकार ने संविदा पर कर रखा है। जैसे ऑडिटर, चार्टर्ड अकाउंटेंट और सब इंजीनियर, जो मैग्निफाइंग ग्लास लेकर एक-एक चीज को बारीकी से देखते हैं, ठोंक बजाकर परखते हैं। इसके बाद ही काम ओके होता है। लेकिन हाल ही में एक नाले में 3 अलग-अलग पुल को मिलाकर एक बनाने के मामले में इस टीम को शायद नींद की झपकी आ गई थी। आरएएस के संविदा इंजीनियर तो नप गए, लेकिन डीएमएफ शाखा वाले संविदा इंजीनियर का बाल भी बांका नहीं हुआ। जबकि काम की शुरुआत में जिओ टैगिंग, सक्षम अधिकारी के औचित्य प्रमाणपत्र के बाद भी उक्त संविदा इंजीनियर मौके पर जाकर निरीक्षण कर आते हैं, फिर काम आगे बढ़ता है, तो इस बार चूक कहां पर हुई या सबकी मिलीभगत से काम चल रहा था।
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बंगले के लिए नहीं मिल रही जमीन
दंतेवाड़ा में पर्याप्त रकबे में नया विधायक बंगला बनाए जाने की बात तय हुई थी। पहल तो बहुत अच्छी हुई, लेकिन जमीन अब तक तलाशी नहीं जा सकी है। इधर सरकार के कार्यकाल का 40 फीसदी समय बीतने को है।
वास्तव में वीवीआईपी के आवासीय कॉलोनी की आवश्यकता तो है, जिसमें विधायक, जिला पंचायत सीईओ से लेकर तमाम जनप्रतिनिधियों को पूर्ण सुरक्षा के साथ रहने की सुविधा दिलाई जा सके। फिलहाल, ज्यादातर जन प्रतिनिधि जर्जर और छोटे साइज वाले सरकारी आवासों में रहने को मजबूर हैं।
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