जेसीबी कल्चर की झलक…(शब्द बाण-102)

जेसीबी कल्चर की झलक…(शब्द बाण-102)

साप्ताहिक व्यंग्य कॉलम शब्द बाण भाग-22
22 सितंबर 2025

शैलेन्द्र ठाकुर । दंतेवाड़ा

जेसीबी फूल बरसाओ, मेरा प्रदेशाध्यक्ष आया है..

बस्तर संभाग मुख्यालय में राजनीतिक दल के यूथ विंग के प्रदेशाध्यक्ष का आगमन चर्चा में रहा। अति उत्साही समर्थकों ने प्रदेशाध्यक्ष के स्वागत में व्यस्ततम चौराहे पर दो जेसीबी अड़ाकर
मंच तैयार किया। तैयारी दोनों तरफ से जेसीबी से फूल बरसाने की थी। साथ ही बुलडोज़र संस्कृति की झलक दिखलाने की भरपूर कोशिश भी। इस चक्कर मे ट्रैफिक इंतजाम और सारे नियम कायदे ताक पर रख दिए गए। सत्ताधारी पार्टी से जुड़ा हुआ मामला होने से पुलिस भी मूकदर्शक बनी रही। वैसे दंतेवाड़ा में भी एक बड़े नेता के आगमन पर भी ऐसे ही बुलडोजर परेड की कोशिश हुई थी।

 

एसडीओ को अभयदान
दंतेवाड़ा में आरईएस विभाग के एक एसडीओ के खिलाफ सरपंचों ने मोर्चा खोल दिया और लिखित शिकायत करके भी देख लिया, लेकिन साहब पर कोई आंच नहीं आई। साहब ने अपनी मासूमियत से सफाई देकर बड़े साहब को प्रभावित कर लिया। सरपंचों ने निर्माण कार्यों की सीसी यानी पूर्णता प्रमाण पत्र जारी करने के एवज में कमीशन उगाही का आरोप लगाया था। सरपंचों की पीड़ा यह है कि पहले काम फिर दाम की जगह पहले दाम फिर काम वाले फॉर्मूला पर एसडीओ साहब चलते हैं। इधर सरपंच निर्माण कार्यों में सीमेंट, छड़ जैसे मटेरियल के लिए मार्केट में लिए गए उधारी के चलते खुद ही हेलमेट में मुंह छिपाए घूमते हैं, तो अब साहब को एडवांस में दसवंद कहाँ से दें। काम का भुगतान हो तो बात बने।  शिकायत के बाद सरपंचों की उम्मीद जागी थी कि अब कोई एक्शन होगा, लेकिन उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया।

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डीएमएफ का हैप्पी बर्थडे
पूरे राज्य में उथल-पुथल मचाने वाले डीएमएफ यानी डिस्ट्रिक्ट मिनरल फण्ड उर्फ जिला खनिज न्यास निधि का 10 वां हैप्पी बर्थडे दंतेवाड़ा में समारोहपूर्वक मनाया गया। किसी शासकीय निधि का हैप्पी बर्थडे मनाने का यह पहला मामला है। हो भी क्यों न, आखिर यह ऐसा जादुई चिराग है, जिसे रगड़कर राज्य के दूसरे जिलों में कुछ बड़े अफसर जेल में बंद हो चुके हैं और प्रकरण अब भी विचाराधीन है। जैसे-जैसे मामला आगे बढ़ता जाएगा, इस स्कोर में और भी इजाफा होगा। वैसे दक्षिण बस्तर में इस चिराग को घिसकर निकल चुके ‘महोदय’ ने नाम और पैसे से ज्यादा बदनामी खूब कमाई। इस फंड के उपयोग के तौर तरीकों को लेकर केंद्र व राज्य सरकार के बीच भी खींचतान चलती रहती है। अब देखना यह है कि नित नए बदलते मापदंड और संशोधन के बीच डीएमएफ और कितने बर्थडे मना पाता है। वैसे, जिस लौह खनिज के एवज में रॉयल्टी के तौर पर यह फंड मिलता है, उसकी खुदाई और ढुलाई में धूल-धक्कड़ खाने वाले जिले की जनता के हिस्से में कितना विकास और सुविधाएं आती हैं, यह तो वक्त ही बताएगा।
यह मशहूर फिल्मी डायलाग की याद दिलाता है-
ज़िंदगी बनाने वाले तूने कमी न की,
अब किसको क्या मिला वो मुकद्दर की बात है
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आपदा में अवसर
भले ही दंतेवाड़ा जिला विनाशकारी बाढ़ की त्रासदी झेलकर उबरने की कोशिश में है, लेकिन आपदा में अवसर तलाशने वालों की बांछें खिल आई हैं। रेत माफिया नदी-नालों की पाट चौड़ी होने और उसमें भरपूर रेत का स्टॉक इकट्ठा होने से खुश हैं, तो वहीं कांट्रेक्टर-सप्लायर भी काम का अवसर मिलने की संभावना तलाश रहे हैं। यह ठीक वैसा ही मामला है, जैसा नक्सलियों द्वारा बिजली के टॉवर गिराने से उत्पन्न ब्लैक आउट त्रासदी के वक्त हुआ था। लोग बिना बिजली के तड़पते रहे। इस आपदा को अवसर में बदलते हुए कई लोगों ने सरकारी दफ्तरों-संस्थानों में जनरेटर सप्लाई कर जमकर नोट कमा लिया। यह बात और है कि कई जनरेटर कुछ साल बाद ही कबाड़ में तब्दील हो गए।

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डबल इंजन में ज्यादा झटका दे रही बिजली
डबल इंजन सरकार में बिजली का बिल तगड़े झटके देने लगा है। आम जनता से लेकर राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता भी हलाकान हैं। पीड़ित तो भाजपा पक्ष के लोग भी हैं, लेकिन उनकी मजबूरी है कि पार्टी लाइन के खिलाफ जाकर कुछ बोल भी नहीं सकते।
इधर कांग्रेसी जरूर बिजली बिल के खिलाफ आवाज़ उठा रहे हैं, और पिछली भूपेश सरकार के हाफ बिजली योजना के फायदे गिनाने और अभी के हालात से तुलना करते दिखते हैं, लेकिन विपक्ष का टैग लगे होने की वजह से उनकी बातों को गम्भीरता से नहीं लिया जा रहा है। इन सबके बीच आम जनता पर बिजली बिल का लोड बढ़ता ही जा रहा है।

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गड्ढे में शराब

बस्तर जिले के बकावंड ब्लॉक में जमीन के नीचे से शराब निकलने का मामला चर्चा में है। सुरा के शौकीन रात में गड्ढे खोदकर शराब निकाल रहे हैं। यह जमीन के नीचे से डीजल-पेट्रोल निकलने जैसा मामला नहीं है। दरअसल, पुलिस ने पूरे जिले भर में जब्त करीब 3 ट्रक अंग्रेजी शराब की बोतलों को बकावंड इलाके के एक गांव में जेसीबी से गड्ढा खोदकर दफना दिया। अब शराब के शौकीनों को पता लगा तो इस गुप्त खजाने की तलाश में जुट गए हैं। रात के अंधेरे में लांग जूते और हाथों में दस्ताने पहनकर गड्ढे से अंग्रेजी शराब की बोतलें खोद कर निकाल रहे हैं। खुद पी रहे और दूसरों को बेच भी रहे हैं। यह अजीबोग़रीब मामला जरूर है, लेकिन किसी बड़े हादसे को न्यौता देने की वजह भी बन सकता है।

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एनएमडीसी के गड्ढे
एनएमडीसी के लिए लौह अयस्क चूर्ण ढुलाई करने स्लरी पाइप लाइन नगरनार से बैलाडीला तक बिछाई जा रही है। इस पाइप लाइन को बिछाने वाली एजेंसी अपना काम बनता, भाड़ में जाए जनता की पालिसी पर काम कर रही है। उसे सिर्फ अपने काम से मतलब है। पाइप लाइन बिछाने के लिए खोदकर छोड़े गए गड्ढों में डूब कर कई मवेशी अपनी जान गंवा चुके हैं, वहीं दो अलग-अलग हादसों में बच्चे भी इन गड्ढों में भरे पानी मे डूबकर असमय काल का ग्रास बन गए। जिन जगहों पर कांक्रीट सड़क व डामरीकृत सड़कों को खोदा गया, उन्हें भी सिर्फ मिट्टी पाटकर दलदल में तब्दील होने के लिए छोड़ दिया गया है। बेलगाम एजेंसी व एनएमडीसी अफसरों पर स्थानीय प्रशासन का भी लगाम नहीं है।

    1. ✍🏻

शैलेन्द्र ठाकुर की कलम से

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