साप्ताहिक व्यंग्य कॉलम ‘शब्द-बाण’ भाग-101
14 सितंबर 2025
शैलेन्द्र ठाकुर । दंतेवाड़ा
हाफ से डबल हुआ बिजली बिल
भूपेश सरकार के कार्यकाल में हाफ बिजली बिल योजना का लुत्फ उठा रहे लोग यह कहते नहीं थकते थे कि बिल हॉफ हो या न हो बिजली जरूर हॉफ हो गई है यानी लो वोल्टेज। अब वही लोग सरकार बदलने के बाद यह शिकायत करने लगे हैं कि अब बिजली का बिल हाफ की जगह डबल आने लगा है। बिजली भी सांय-सांय आ रही है और जा रही है। अब बिल ज्यादा आने का जिम्मेदार घरों में नया लगाया गया स्मार्ट मीटर है या फिर मौजूदा सरकार, यह समझना थोड़ा मुश्किल है, पर विभाग उपभोक्ताओं को बिजली के झटके बराबर दे रहा है।
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सिर पर गिरने लगा विकास
जगदलपुर स्थित काकतीय पीजी कॉलेज में एकेडमिक कार्यक्रम के दौरान ऑडिटोरियम की फाल सीलिंग उखड़कर गिर गई। छात्रा के सिर पर गिरी फॉल सीलिंग ने पूरे सिस्टम की ही पोल खोलकर रख दी है। यह हादसा भी ऐसे वक्त हुआ, जब विकसित छत्तीसगढ़ कार्यक्रम चल रहा था। स्टेज पर अतिथि विराजमान थे और सामने स्टूडेंट्स। हादसे के बाद फिर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप की बौछार शुरू हो गई। एनएसयूआई ने भाजपा सरकार को कोसा, दूसरी तरफ एबीवीपी ने पलटवार करते कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में ही इस फॉल सीलिंग के घटिया निर्माण की शिकायत कर चुके थे। खैर, आरोप-प्रत्यारोप के बीच सच बात तो यह है कि अब तक बस्तर संभाग में कई पीढियां गढ़ने वाले सबसे पुराने व सबसे बड़े पीजी कॉलेज की स्थिति उस असहाय बुजुर्ग की तरह हो गई है, जिसे उसकी ही संतानें बोझ समझकर वृद्धाश्रम छोड़ आई हों।
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शौचालय आंदोलन की सुगबुगाहट
दंतेवाड़ा बस स्टैंड से गायब हुए सार्वजनिक सुलभ शौचालय को लेकर कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया और आंदोलन करने की चेतावनी तक दे दी, तब जाकर इस लापता सुलभ काम्प्लेक्स के निर्माणाधीन साइट पर पालिका के लोग पहुंचे। कहा गया कि निर्माण कार्य जल्द शुरू होगा। इसके पहले महीनों से लोग इस सुलभ काम्प्लेक्स वाली जगह तक जाकर बैरंग लौट आते थे। पुराने भवन की जगह सिर्फ कॉलम के गड्ढे खुदे हुए ही दिखते थे।
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नाबालिग पुल की मौत
पिछले दिनों आई विनाशकारी बाढ़ में दंतेवाड़ा में काफी कुछ बहकर नदी में चला गया। इनमें दंतेवाड़ा नदी पर बायपास मार्ग का 100 मीटर लंबा पुल भी था, जो कि इंसानों के वोट देने की उम्र 18 साल तक भी नहीं जी सका। नाबालिग पुल के ढहने के लिए जिम्मेदार तकनीकी खामियों की जांच का कोई इरादा न तो सरकार जाहिर कर रही है, न ही संबंधित विभाग। फिर यहां बनने वाले नए पुल की मजबूती कैसे सुनिश्चित होगी? खैर, लोग अब यह महत्वपूर्ण रास्ता बंद होने से परेशान हैं, साथ ही भारी वाहनों के नगर के भीतर से दौड़ने को लेकर भी चिंतित हैं।
“मिलता था सुकून जिसकी छांव में,
सुनते हैं कि वो दरख़्त भी कल रात कट गया।”
*दरख़्त=पेड़
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काम की गारंटी, भुगतान की नहीं
दक्षिण-पश्चिम बस्तर में ठेकेदारों की शिकायत यह है कि काम करने के बाद भुगतान के लिए जूते-चप्पल घिसते रह जाते हैं। पैरागान कंपनी ने ऐसे कार्यों के लिए जो स्पेशल ऑफिस चप्पल निकाला हुआ है, वो चप्पल भी यहां पूरी घिस जाती है। लेकिन भुगतान नहीं मिलता है। वहीं, जान-बूझकर लंबे समय तक फ़ाइल अटकाने के बाद अफसर तबादले पर चले गए तो पुराने काम का भुगतान नहीं होगा वाला टैग चिपका दिया जाता है, चाहे सब कुछ विधिवत हुआ हो। कुछ ठेकेदारों का कहना है कि ठेकेदारी को गैर कानूनी कार्य की तरह ट्रीट किया जाता है, जबकि सरकार खुद इसके लिए अलग-अलग श्रेणी का लाइसेंस देती है। प्रोग्रेस को लेकर कभी-कभी मार-कुटाई और गाली-गुफ्तार तक झेलना पड़ता है। इतना तो सटोरिये भी बेइज्जत नहीं होते। राज्य भर में भुगतान संकट की स्थिति को देखते हुए ठेकेदारों ने प्रांतीय हड़ताल का मन बनाया है। अगर ऐसा हुआ तो बाढ़ आपदा से तहस-नहस हुए इंफ्रा स्ट्रक्चर को फिर से तैयार करने की योजना खटाई में पड़ सकती है।
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बीईओ की वापसी का मुद्दा
गीदम बीईओ के निलंबन, बहाली और विवाद मामले का पटाक्षेप होता नहीं दिख रहा है। युक्तियुक्तकरण में गड़बड़ी मामले में निलंबन का सामना कर रहे बीईओ ने जितनी तत्परता और तेजी से खुद को बहाल करवाया, उससे लोग हैरान हैं। बस, गड़बड़ी यह हो गई कि बीईओ ने बहाली के वरदान में वही पुरानी कुर्सी मांग लिया, जिस पर बैठकर निलंबित हुए थे। नतीजा यह हुआ कि गीदम ब्लॉक के शिक्षकों ने कई स्तर पर मोर्चा खोल दिया। संभाग स्तर पर कमिश्नर, जेडी से तो मुलाकात की ही, बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष से भी मिलकर अपना विरोध जताया। विरोध कर रहे शिक्षकों के संख्या बल को देखते हुए बचाव पक्ष की यह दलील भी खारिज हो गई कि बीईओ का विरोध सिर्फ कुछ शिक्षकों के व्यक्तिगत खुन्नस का नतीजा है। अब देखना यह है कि इसका फाइनल नतीजा क्या निकलता है।
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किस्सा ऑडिटोरियम का
शिक्षक दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में दंतेवाड़ा के संवेदनशील विधायक महोदय ने सांस्कृतिक आयोजनों के लिए नया ऑडिटोरियम भवन निर्माण की घोषणा कर दी है। इससे लोगों में खुशी का माहौल तो है, लेकिन हायर सेकंडरी स्कूल परिसर में बने बनाए ऑडिटोरियम का हश्र देखकर शंकित भी हैं। इसमें मंचीय कार्यक्रम तो नहीं हुए, लेकिन केंद्रीय विद्यालय और पॉलीटेक्निक कॉलेज के शुरुआती संचालन में इसका उपयोग हुआ। फिर इसके बाद इसे छात्रावास बना दिया गया। इसके बदले जो नया ऑडिटोरियम बना, उसकी खुशी कुछ दिन तक ही रही। फिर महोदय ने इसे भी निजी सिनेमा हॉल के लिए किराए पर उठा दिया, ताकि ‘खर्च’ निकलता रहे। अब देखना यह है कि नया ऑडिटोरियम भवन कहां बनता है और कब तक मूल प्रयोजन के लिए उपलब्ध रहता है।
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पाठकों से….
साप्ताहिक व्यंग्य कॉलम “शब्द-बाण” ने 101 एपिसोड की मंजिल तय कर लिया है। दक्षिण बस्तर जैसी जगह से पहला व्यंग्य कॉलम शुरू करना जितना आसान था, उतना ही कठिन इसकी निरंतरता जारी रखना भी था। इसके बाद भी बिना नागा किए हर सप्ताह यह व्यंग्य कॉलम आपके सामने लाने की कोशिश काफी हद तक सफल रही। यह आप सभी सुधि पाठकों के स्नेह, समर्थन और अमूल्य फीडबैक से संभव हो सका है। आपकी अपेक्षाओं पर खरा उतरने की कोशिश हमने की और परिणाम आपके सामने है।
आगे भी आपके बहुमूल्य सुझावों, आलोचनाओं की प्रतीक्षा हमेशा रहेगी।
सदैव आपका ही…
–शैलेन्द्र ठाकुर

शैलेन्द्र जी, दक्षिण बस्तर के जमीनी हकीकत से रूबरू कराता आपके लेख का इंतजार हर सप्ताह रहता है हालांकि कई दफा आप गोल मार जाते हो। निरंतरता बनाए रखें। आपके उन्नति की शुभकामनाओं के साथ
धन्यवाद सर। कोशिश यही रहती है कि निरंतरता बनी रहे।
बहुत बढ़िया
मैं सभी साप्ताहिक व्यंग पढ़ता हूँ।
बहुत बहुत धन्यवाद आपको।
*आपके इस कालम में सच भी है समाचार भी है हास्य भी होता है। कुछ चिंतन योग्य और कुछ विचार योग्य होता है। ये आपकी काबिलियत है कि आपने व्यंग्य के माध्यम से सच को बताने का प्रयास किया है। निरंतरता बनाये रखने के लिए पाठकों की ओर से आपको बधायी देता हूँ। शुभकामनायें देता हुँ कि व्यंग्य-बाण चलता रहे।
😍😍😍😍
बहुत बहुत धन्यवाद आपको। स्नेह ऐसे ही बनाए रखें
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*आपके इस कालम में सच भी है समाचार भी है हास्य भी होता है। कुछ चिंतन योग्य और कुछ विचार योग्य होता है। ये आपकी काबिलियत है कि आपने व्यंग्य के माध्यम से सच को बताने का प्रयास किया है। निरंतरता बनाये रखने के लिए पाठकों की ओर से आपको बधायी देता हूँ। शुभकामनायें देता हुँ कि शब्द-बाण चलता रहे।
😍😍😍😍
बेहतरीन लेख सर, आसान नहीं होता हर खबर पर पैनी नजर रखना और कलम चलाना,
निरंतरता बनाये रखें.
शुभकामनाओं सहित
धन्यवाद सर