नक्सलगढ़ से अपराध गढ़ की ओर.. (शब्द बाण – 132)

नक्सलगढ़ से अपराध गढ़ की ओर.. (शब्द बाण – 132)

साप्ताहिक व्यंग्य कॉलम शब्द बाण भाग – 132
18 अप्रैल 2026

शैलेन्द्र ठाकुर @ दंतेवाड़ा

डीएमएफ वाला चुआँ
पेयजल के पुराने व पारंपरिक स्रोत रहे गड्ढानुमा झिरिया या चुआँ के बारे में यह तथ्य सर्वज्ञात है कि इसका पानी जितना ज्यादा उलीच कर बाहर फेंका जाता है, उतना ही इसके भीतर से और साफ पानी बाहर निकल आता है। ठीक ऐसी ही धारणा जिला खनिज न्यास निधि डीएमएफ के बारे में बनी हुई है। हर साल खनिज रॉयल्टी का पैसा जिले के खाते में आता है, बस पुराने वित्तीय वर्ष की समाप्ति का इंतजार करना पड़ता है। इसी आस में दंतेवाड़ा जिले के राजनीतिक हितग्राही व पंच-सरपंच बैठे हुए हैं कि बीते साल तो मेडिकल कॉलेज निर्माण के लिए 300 करोड़ रुपए डीएमएफ से बुक कर दी गई थी, कम से कम इस बार यह समस्या नहीं रहेगी। इस बीच नए वित्तीय वर्ष का पहला पखवाड़ा भी बीत चुका है और डीएमएफ का चुआं धन से कब रिचार्ज होगा, इसका इंतजार जारी है। फिर भी लोगों को काफी उम्मीदें हैं।

ग़ालिब ने कहा भी है –

हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त !
लेकिन दिल को खुश रखने को ‘ ग़ालिब ‘ ये ख्याल अच्छा है!!
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लंगड़ों की खोज में पुलिस
लंगड़े चोरों ने दंतेवाड़ा पुलिस की नाक में दम कर रखा है। पुलिस की तीसरी आंख कहे जाने वाले सीसीटीवी कैमरे भी अक्सर बेवफाई कर जाते हैं। अगर कहीं जुगाड़ से निजी कैमरों की फुटेज मिल भी जाए तो चोर लंगड़ाते हुए सारा गणित बिगाड़ देते है। दरअसल, सुरभि कालोनी समेत कुछ इलाकों में हुई चोरी की घटनाओं के बाद सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए। इससे पता चला कि सीसीटीवी कैमरों के सामने आते ही शातिर नकाबपोश चोर लंगड़ाते हुए चलने लगे। अब पुलिस फिलहाल लंगड़े चोरों की तलाश में जुटी है। इसके लिए समाज कल्याण विभाग से भी संपर्क साधने की कोशिश में है, ताकि हितग्राहियों की सूची से कोई सुराग मिल सके। वैसे मुसाफिरी पंजी में बाहरी आगंतुकों का नाम पता दर्ज करने और सख्ती से नजर रखने का प्रावधान तो है, लेकिन उसका गंभीरता से पालन नहीं होता है। यह मुद्दा पिछले दिनों शांति समिति की बैठक में भी उठ चुका है l
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ख्वाब जैसी हक़ीक़त

जिस नक्सली समस्या का निराकरण असंभव समझा जा रहा था, उसे केंद्र सरकार व मोटाभाई ने 2 साल की डेडलाइन घोषित कर निपटा दिया।
जवानों के शौर्य, बलिदान व सरकार की मजबूत इच्छाशक्ति के आगे लाल लड़ाकों को घुटना टेकना ही पड़ा। पुलिस व आम जनता कभी देवजी, देवा, पापाराव, सोनू, चैतू जैसे नक्सली लीडरों के सिर्फ नाम ही सुन पाती थी, इन लीडरों के फोटो तक नहीं देख पाए थे, उन्होंने जंगल से निकलकर हथियार रख दिए। कई एनकाउंटर और सैकड़ों सरेंडर के बाद केंद्र सरकार ने सभी जिलों को नक्सल प्रभावित की श्रेणी से मुक्त घोषित कर लीगेसी एंड थ्रस्ट कैटेगरी में डाल दिया है। राजनेताओं की केकड़ा राजनीति की वजह से ही नक्सलवाद इतने दशकों तक फल – फूल रहा था। अब अगर नक्सलवाद का सचमुच अंत हो गया है, तो सर्वदलीय सहमति से ही विकास की नई इबारत लिखी जा सकती है। इसके लिए पक्ष-विपक्ष को अनावश्यक आरोप-प्रत्यारोप से बचने की जरूरत है। अब आगे सरकार कितनी तेजी से विकास कार्य कर लोगों के भरोसे पर खरी उतरती है, यह देखने वाली बात होगी। वैसे, नक्सल मोर्चे पर यह सब कुछ इतनी तेजी से हुआ कि लोग इस पर यकीन नहीं कर पा रहे हैं।

पाकर उसे दिल और भी बेताब लगे है
ये कैसी हक़ीक़त है, जो ख्वाब लगे है?
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दंतेवाड़ा आयेंगे मास्टर ब्लास्टर सचिन
टीम इंडिया के मास्टर ब्लास्टर रहे क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के साथ दंतेवाड़ा जिले के प्रवास पर आ रहे हैं। प्रशासन उनके प्रवास की तैयारियों में जुटा हुआ है। क्रिकेटर सचिन के फाउंडेशन ने दक्षिण बस्तर के खेल मैदानों को तैयार करने का बीड़ा उठाया है। उनके आगमन से निश्चित रूप से दक्षिण बस्तर ही नहीं बल्कि समूचे बस्तर में खिलाड़ी प्रेरित होंगे, इसमें कोई शक नहीं। लेकिन सफेद हाथी साबित हो रहे सरकारी खेल विभाग की सुस्ती और भ्रष्टाचार भी दूर हो, तभी कोई बात बनेगी। बस्तर पंडूम और ओलंपिक में इस विभाग के हुनर का प्रदर्शन जगजाहिर हो चुका है।
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शादी के मेगा इवेंट की तैयारी
खबर है कि दक्षिण बस्तर में महिला व बाल विकास विभाग फिर से सामूहिक विवाह का मेगा इवेंट करवाने की तैयारी में है। यह बात और है कि हर साल सामूहिक विवाह के जरिए सैकड़ों लोगों के घर बसाने वाले इस विभाग के अफसर पर ही यौन उत्पीड़न की कोशिश के गंभीर आरोप लगे हैं। मामले की जांच भी हो रही हो और उसी अफसर के नेतृत्व में मंगलाचरण की तैयारी हो रही हो, और मातहत कर्मचारी मन लगाकर काम करें, यह बात लोगों को हजम नहीं रही है। मगर जुगाड़ और एप्रोच वाले जमाने में कुछ भी असंभव नहीं।
किसी में क्या खूब कहा है –

कुछ तो हकीकत हुआ करती थी अफसानों में
वो भी बाकी न रहा इस दौर के इंसानों में ।
शाख से कटने का ग़म तो बहुत था मगर,
फूल मजबूर थे, हंसते रहे गुलदानों में ।।
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नक्सलगढ़ से अपराधगढ़ की ओर
अब तक नक्सलगढ़ की पहचान पीठ पर ढो रहे बस्तर को इससे मुक्ति तो मिलती नजर आ रही है, लेकिन दूसरी तरफ अब नक्सलवाद की फसल मुरझाते ही रूटीन क्राइम तेजी से बढ़ने लगा है। बीजापुर के भैरमगढ़ में नाबालिग से गैंगरेप की घटना हो या बात – बात पर वाहनों से वसूली, जुआ – सट्टा, धड़ाधड़ हो रही चोरी की घटनाएं, सभी ने आम जन की चिंता बढ़ा दी है। अब तक सिर्फ नक्सलियों से निपटने में अभ्यस्त रही पुलिस के पास रूटीन क्राइम की जांच के लिए कुशल इन्वेस्टिगेटिव अफसरों की कमी हो गई है। अब रूटीन क्राइम पर नियंत्रण, इन्वेस्टिगेशन और लॉ एंड ऑर्डर की अलग से ट्रेनिंग दिलाने की जरूरत पड़ती दिख रही है, ताकि नक्सलगढ़ से अपराधगढ़ की ओर कदम बढ़ाने से रोका जा सके। कांकेर में संचालित काउंटर टेररिज्म एंड जंगल वारफेयर ट्रेनिंग स्कूल की तर्ज पर जल्द ही कोई नया विशेष पुलिस ट्रेनिंग स्कूल खुल जाए तो भी आश्चर्य न होगा।
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रॉकेट साइंस वाला स्कूल
बीजापुर जिले के एक अंदरूनी गांव में बन रहा स्कूल चर्चा में है। अफसरों और ठेकेदार के गठजोड़ से इस स्कूल में रॉकेट साइंस का इस्तेमाल हो रहा है। कॉलम के गड्ढे खोदने की जगह जमीन की सतह से ही सरिए डालकर बिल्डिंग खड़ा करने की यह अनूठी तकनीक पेटेंट करवाने की हकदार है, ताकि बौद्धिक संपदा के तौर पर यह टेक्नोलॉजी मुफ्त में बाहर न जा सके।
ग्राम पंचायत चिनगेर में यह अजूबा भवन बन रहा है। यह वही बीजापुर जिला है, जहां नक्सलवाद की आड़ में ऐसे सैकड़ों स्कूल भवन दशकों तक नहीं बन पाए थे। अब जबकि सरकार ने इसे नक्सलमुक्त घोषित किया है, तब भी ऐसी स्थिति है। ऐसे में सरकार कैसे आम जन का भरोसा फिर से जीत पाएगी?
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