पत्तियों से ज्यादा फूलों से लदे आम के पेड़, बंपर पैदावार की उम्मीद
शैलेन्द्र ठाकुर । दंतेवाड़ा
दक्षिण बस्तर का दंतेवाड़ा जिला, जो अपनी जैविक खेती की मुहिम के लिए देश भर में पहचाना जा रहा है, इस वर्ष एक नई उपलब्धि की ओर अग्रसर है। अवसान की ओर बढ़ रहे गुलाबी ठंड के बीच, जिले के ग्रामीण अंचलों—गीदम, कुआकोंडा, कटेकल्याण और दंतेवाड़ा ब्लॉक के गांवों से गुजरते ही आम के बगीचों का नजारा बदला हुआ नजर आ रहा है। इस बार आम के पेड़ों पर पत्तियां कम और सुनहरा ‘मौर’ (मंजरी ) अधिक दिखाई दे रहा है, जो आने वाले समय में आम की बंपर पैदावार और किसानों की आर्थिक समृद्धि का स्पष्ट संकेत है।
वैज्ञानिक बता रहे अनुकूल आधार
कृषि विशेषज्ञों और उद्यानिकी विभाग के अनुसार, इस वर्ष आम में असाधारण फ्लावरिंग के पीछे कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक और प्राकृतिक कारण हैं-
स्थिर शीत लहर और तापमान: इस वर्ष दिसंबर और जनवरी के दौरान रात का तापमान 10° से 15° डिग्री सेंटीग्रेड के बीच स्थिर रहा। बिना किसी बड़े उतार-चढ़ाव वाली इस ठंड ने पेड़ों में ‘फ्लोरल इंडक्शन’ की प्रक्रिया को बेहद मजबूत बनाया है, जिससे फूलों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है।
वन ईयर का प्रभाव:
आम की प्रकृति के अनुसार, एक साल अच्छी फसल के बाद अगला साल हल्का रहता है। पिछला वर्ष तुलनात्मक रूप से कम पैदावार वाला था, जिससे इस साल पेड़ों के पास संचित ऊर्जा (कार्बोहाइड्रेट ) अधिक है, जो भारी मंजर के रूप में सामने आ रही है।
प्राकृतिक तनाव :
अक्टूबर-नवंबर के शुष्क मौसम ने पेड़ों को सही मात्रा में प्राकृतिक तनाव दिया।इससे पेड़ों ने वानस्पतिक विकास (पत्तियां आना) को रोककर अपना पूरा ध्यान प्रजनन (फूलों) की ओर केंद्रित किया।
जैविक प्रबंधन की सफलता:
दंतेवाड़ा जिला प्रशासन द्वारा लगातार जैविक खेती को दिए जा रहे प्रोत्साहन का असर अब जमीनी स्तर पर दिखने लगा है। मिट्टी के बेहतर स्वास्थ्य और जैविक खाद के संतुलित प्रयोग से पेड़ों की प्रतिरोधक क्षमता और उत्पादन क्षमता दोनों में सुधार हुआ है।
मंजरी को फल में बदलने की चुनौती
किसानों के लिए सलाह
इतने अधिक मौर को देखकर उत्साहित होना स्वाभाविक है, लेकिन इन्हें सुरक्षित रूप से फलों में बदलना ही असली चुनौती है। उद्यानिकी विभाग ने जिले के अन्नदाताओं के लिए कुछ महत्वपूर्ण सावधानियां जारी की हैं-
सिंचाई प्रबंधन:
जब तक फूल पूरी तरह खिलकर ‘मटर के दाने’ के आकार के फल न बन जाएं, तब तक भारी सिंचाई से बचें। अधिक नमी के कारण फूल झड़ने की समस्या हो सकती है।
जैविक कीट नियंत्रण:
मधुआ कीट (हॉपर ) और भभूतिया रोग (पाउडरी मिलड्यू ) से बचाव के लिए रसायनों के स्थान पर नीम तेल या दशपर्णी अर्क का छिड़काव सुबह या शाम के समय करें।
धुंध और कोहरे से बचाव:
सुबह के समय यदि धुंध अधिक हो, तो फूलों पर साफ पानी का हल्का छिड़काव करें ताकि उन पर काली फफूंद न जम पाए。
मित्र कीटों का संरक्षण: किसान भाइयों को सलाह दी गई है कि वे घातक रासायनिक कीटनाशकों से बचें ताकि मधुमक्खियां और अन्य मित्र कीट परागण (पॉलिनेशन ) का काम बिना किसी बाधा के पूरा कर सके।
प्रशासन का संकल्प
उप संचालक कृषि सूरज कुमार पंसारी ने बताया कि दंतेवाड़ा जिला प्रशासन और कृषि एवं उद्यानिकी विभाग किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है। ‘जैविक जिला’ के रूप में हमारी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि दंतेवाड़ा के आम न केवल मात्रा में अधिक हों, बल्कि उनकी गुणवत्ता और मिठास भी देश-दुनिया तक पहुँचे。
यह वर्ष दंतेवाड़ा के किसानों के लिए खुशहाली और तरक्की का नया अध्याय लिखने को तैयार है।
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