बस्तर में मुंगेरी लाल के हसीन सपने…(शब्द बाण-128 )

बस्तर में मुंगेरी लाल के हसीन सपने…(शब्द बाण-128 )

साप्ताहिक व्यंग्य कॉलम “शब्द बाण” भाग-128
22 मार्च 2026

शैलेन्द्र ठाकुर @ BastarUpdate.com

मुंगेरीलाल के हसीन सपने

आखिरकार बस्तर जिला पंचायत में आईएएस सीईओ के खिलाफ अध्यक्ष समेत अन्य पदाधिकारियों ने मोर्चा खोल दिया है। यह सहनशीलता की पराकाष्ठा ही कही जा सकती है कि सौम्य और सरल व्यवहार वाली अध्यक्ष ने अपनी पीड़ा मीडिया के माध्यम से व्यक्त करते कहा कि अगली बार से सामान्य सभा की बैठक नहीं बुलाएंगी। ऐसी बैठक का क्या फायदा, जिसमें अफसरों के आगे जनप्रतिनिधियों की कोई सुनवाई नहीं होती हो। ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है कि किसी जिला पंचायत में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की सुनवाई नहीं हो रही हो। नक्सल प्रभावित रहे बस्तर संभाग के अधिकांश जिलों में जिला पंचायत की भूमिका बड़े साइज वाले स्पीड ब्रेकर की तरह हो चुकी है। डायरेक्ट आईएएस जिला पंचायत सीईओ और कलेक्टर के इगो की लड़ाई में फाइलें धूल खाने लगती हैं। कलेक्टर ने किसी विकास कार्य को ओके कर भी दिया तो जिला पंचायत में फाइल नहीं अटकेगी, इसकी कोई गारंटी नहीं रहती। अब तेजी से नक्सलमुक्त हो रहे जिलों में आगे भी यही स्थिति रही तो फिर समग्र विकास की कल्पना मुंगेरी लाल के हसीन सपने की तरह ही रह जाएगी, इसमें कोई शक नहीं।
——–

गंगा दास – जमुना दास

गंगा गए गंगा दास, जमुना गए जमुना दास टाइप एक अवसरवादी शिक्षक को मुख्य सेंटर का बीआरसी बनाये जाने से मामला बड़ा दिलचस्प हो गया है। कांग्रेस शासन काल में सत्ता के काफी करीबी रहे गुरुजी का कालांतर में बीआरसी के पद पर प्रमोशन हुआ। पुराने बीआरसी को 16 सदस्यीय टीम के सदस्य की तरह प्लेइंग इलेवन से बाहर रखकर बेंच पर बिठा दिया गया, फिर टीम से ही आउट कर दिया गया। अब इस बीआरसी से न तो विभागीय अफसर और अमला खुश है, न ही भाजपा के लोग। यहां तक कि गणतंत्र दिवस की झांकी पर आए खर्च के भुगतान को लेकर लोग भटक रहे हैं।
मजेदार बात यह है कि जब बीआरसी की पोस्टिंग हुई थी, तब निष्ठावान भाजपाई खुद हतप्रभ रह गए थे। उन्हें यह समझ नहीं आ रहा था कि भाजपाई खेमे से यह नियुक्ति हुई है, या कांग्रेसी वाइल्ड कार्ड से। यह भी जगजाहिर है कि सत्ता और सिस्टम के साथ पूरी तरह एडजस्टेबल और कॉम्पिटिबल गुण रखने वाले इस गुरुजी ने तत्कालीन एसी को निपटाने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। टैलेंट इतना कि ईओडब्ल्यू की टीम भी गुरुजी के घर चाय पीकर रिश्तेदारी निभा गई।
——-

इस्तीफा- इस्तीफा
दंतेवाड़ा जिले में इस्तीफा-इस्तीफा खेला जा रहा है। यहां एक प्रमुख राजनीतिक दल के जिलाध्यक्ष के इस्तीफे की चर्चा इन दिनों आम है। अब यह दल सत्ताधारी है या विपक्ष का, यह पहेली बूझने में लोग जुटे हुए हैं। वैसे, इतना क्लू दिया जा सकता है कि इस दल में पहले भी एक जिलाध्यक्ष से इस्तीफा लिखवा तो लिया गया था, लेकिन मंजूर नहीं हुआ था। बाद में लंबी पारी खेलने का मौका मिल गया। इस बार भी इतिहास अपने आप को दोहराता है या फिर इस्तीफा मंजूर होता है, यह देखने वाली बात होगी। इस्तीफे वाली बात महज कोरी अफवाह साबित होती है, या सच, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।
——-
सड़क पर तला भजिया
ईरान-इजराइल युद्ध और भारत में रसोई गैस संकट इन दिनों गर्मागर्म मुद्दा बना हुआ है। सत्तापक्ष के समर्थक सरकार के बचाव में उतरे हुए हैं, तो वहीं विपक्ष नए-नए तरीकों से विरोध प्रदर्शन करने का कोई मौका नहीं छोड़ रहा है। दंतेवाड़ा में तो महिला कांग्रेस नेत्रियों ने सड़क पर भजिया-पकौड़ा तलकर अनूठा विरोध प्रदर्शन किया। वैसे भी काम-काज का संकट और जिस तरह की अघोषित आर्थिक मंदी छाई हुई है, उस स्थिति में राजनीतिक पार्टियों के जमीनी कार्यकर्ताओं नेताओं के पास भजिया तलने जैसी स्थिति ही है। ये बात और है कि विपक्षी दल कम से कम सड़क पर उतरकर अपना दर्द बता तो पा रहे हैं, वरना सत्ता पक्ष के लोग तो न कराह पा रहे हैं, न ही दर्द किसी और से बयां करने की हालत में हैं। उनकी न मंत्री सुन रहे, न अफसर। हालात ऐसे हैं कि

किससे करें शिकायत, किसपे करें ऐतबार हम।
जिसे अपना समझते हैं, वही बेगाना निकलता है।
——-

एक म्यान में दो तलवारें
बीजापुर जिले में शिक्षा विभाग में दो-दो डीईओ का मामला सौतन के झगड़े की तरह उलझता ही जा रहा है। सरकार और शिक्षा मंत्री इसे सुलझाने की बजाय किनारे बैठकर चटखारे लेने में लगे हैं। छात्रावासों में फर्जी अटेंडेंस कांड, फिर छात्राओं के गर्भधारण जैसे कांड पर कांड होने से हुई किरकिरी के बाद भी सरकार सिस्टम सुधारने के मूड में नहीं दिख रही है। एक म्यान में दो तलवार जैसी स्थिति को लेकर
नौबत यहां तक आ गई कि मामला विधानसभा में उछल गया। स्थानीय विधायक को विधानसभा में सवाल करना पड़ा कि आखिर दो-दो डीईओ क्यों? लेकिन विपक्षी विधायक की आवाज को सरकार गंभीरता से ले ही लेगी, इसकी कोई गारंटी नहीं दिखती है। यह सरकार की भलमनसाहत पर निर्भर करता है।
——–
बंगले के मेंटेनेंस का बजट

जिला पंचायत सीईओ के बंगले पर जिला गठन से अब तक हुए कुल खर्च का अनुमान लगाया जाए, तो इतने बजट में जिले के किसी एक ब्लॉक का साल भर का संपूर्ण विकास कार्य आसानी से निपट जाएगा। इस राशि से ऐसे कई भव्य बंगले भी बन जाएंगे। वर्ष 1998 में हुए जिला गठन के बाद से अब तक जितने भी साहब डंकनी तट पर स्थित इस बंगले में रहने आए, सभी ने टाइल्स से लेकर वायरिंग तक बदलवा दी। हर बार नए सिरे से एक्सटीरियर और इंटीरियर की पेंटिंग, फर्नीचर से लेकर टीवी, फ्रिज, कूलर से जैसे होम एप्लाएंसेज तक बदल दिए गए। इसके बाद भी हर बार नए बदलाव के साथ ही साहब बंगले में गृह प्रवेश करते हैं। जनता को भले ही शुचिता व मित व्ययिता का पाठ पढ़ाते हों, पर ऐसे कई मामले हैं, जो विरोधाभास साबित करते हैं। यह सारा खर्च वेतन से और ऑन दी रिकार्ड होने से तो रहा, जाहिर सी बात है कि किसी न किसी जगह के विकास कार्य की बलि ही दी जानी है। खैर, बड़े लोग बड़ी बातें।
——-

हाजिरी लगाने वाले खुद गैरहाजिर

आम तौर पर डीईओ – बीईओ स्कूलों का औचक निरीक्षण कर गायब शिक्षकों की गैरहाजिरी दर्ज करते हैं, शिक्षकों का वेतन काट दिया जाता है। लेकिन इस बार मामला उल्टा हो गया। बस्तर में बड़े साहब जेडी यानी ज्वाइंट डायरेक्टर ने डीईओ और बीईओ के दफ्तर पर ही रेड डाल दिया। दोनों ही साहब समेत कुल 54 स्टाफ मौके पर गैर हाजिर मिले। वैसे यह मामला गैरहाजिरी का कम, लेट लतीफी का ज्यादा लगता है। दरअसल, साहब ने दफ्तर शुरू होने के समय में यह रेड डाली थी। एक बात तो साफ है कि आदत से मजबूर लोगों को बायोमैट्रिक अटेंडेंस सिस्टम भी पूरी तरह लाइन पर नहीं ला सका है। भारतीय समयानुसार लेट से आने और जल्दी जाने की आदत तो पुरानी बीमारी है। अब देखना यह है कि गैरहाजिर पाए गए साहबों का वेतन कटता है या फिर क्रिकेट की तरफ “बेनिफिट ऑफ डाउट” का फायदा मिलता है।
—-

✍🏻 शैलेन्द्र ठाकुर की कलम से

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सिंचाई प्रोजेक्ट बनाम दुधारू गाय (शब्द बाण – 127)

सिंचाई प्रोजेक्ट बनाम दुधारू गाय (शब्द बाण – 127)

साप्ताहिक व्यंग्य कॉलम शब्द बाण भाग 127 15 मार्च 2026 शैलेन्द्र ठाकुर @BastarUpdate.com जनगणना का फेर पूरे डेढ़ दशक बाद फिर से जनगणना शुरू हो...