लाइलाज हुआ सुकमा रोड का मर्ज़.. (शब्द बाण – 151)

लाइलाज हुआ सुकमा रोड का मर्ज़.. (शब्द बाण – 151)

साप्ताहिक व्यंग्य कॉलम शब्द बाण भाग – 151
30 अगस्त 2026

शैलेन्द्र ठाकुर । दंतेवाड़ा

आखिर ऊंट आया पहाड़ के नीचे..
आखिरकार शिक्षा विभाग ने शिक्षकों की विभागीय टीईटी परीक्षा लेने का निर्णय ले ही लिया। आंदोलित हो रहे शिक्षकों से चर्चा के बाद विभागीय मंत्री का रवैया बदला। अब विभाग पहले से कार्यरत शिक्षकों के लिए परीक्षा लेगा। नौकरी में बने रहने के लिए टीईटी परीक्षा पास करना अनिवार्य कर देने से लाखों शिक्षकों की नींद उड़ गई थी। परीक्षा देने की उम्र पार कर चुके शिक्षकों के लिए यह फरमान अव्यवहारिक था। अब राज्य सरकार के नए फैसले से शिक्षकों को बड़ी राहत मिली है, जो वीएसके एप से ऑनलाइन अटेंडेंस लगाने का बड़ा ज़ख्म भुलाकर टीईटी पास करने की चिंता में दुबले हुए जा रहे थे।
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गैस की तकलीफ
दंतेवाड़ा जिले में रसोई गैस मिलने की अवधि 45 दिन से घटाकर 25 दिन करने की मांग को लेकर बस्तर सांसद ने केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री को चिट्ठी लिखी, यह बात सप्ताह भर से चर्चा में है। अगर केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री ने उनकी बात को गंभीरता से लिया तो गैस की किल्लत से लंबे समय से परेशान उपभोक्ताओं के लिए सांसद का यह पत्र काफी राहत देने वाला साबित हो सकता है। नगरीय क्षेत्र की गैस एजेंसियों का स्टेटस अब तक ग्रामीण क्षेत्र के रूप में ही क्यों दर्ज है, यह बड़ा सवाल है। एक तरफ सरकार लकड़ी के चूल्हे के धुएं से गृहिणियों को मुक्ति दिलाने उज्ज्वला गैस योजना संचालित कर रही है, दूसरी तरफ 45 दिनों में गैस रीफिलिंग का चोंचला अपनाकर गृहिणियों की अग्नि परीक्षा लेने पर उतारू हो गई है। शुक्र है कि सांसद ने आम लोगों की पीड़ा को आवाज़ देने की कोशिश तो की।
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सचिवों का बहिष्कार
कटेकल्याण ब्लॉक में पंचायत सचिवों ने समीक्षा बैठक का बहिष्कार कर अपनी नाराजगी जताई। हड़ताल अवधि का वेतन अब तक नहीं मिलने को लेकर उनका गुस्सा फूट पड़ा। बात – बात पर सस्पेंड किए जाने से परेशान पंचायत सचिव पहले ही काफी वर्क लोड से दबे हुए हैं। ऐसे में अन्य जिलों में हड़ताल अवधि के वेतन का भुगतान होने की सूचना ने आग में घी डालने का काम किया।

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लाइलाज हुआ मर्ज़

सुकमा – जगदलपुर मार्ग की बीमारी लाईलाज होती चली जा रही है। बस्तर की लाइफ लाइन कहे जाने वाले जेके रोड यानि जगदलपुर – कोंटा मार्ग पर सुकमा से जगदलपुर के बीच सफर करना इन दिनों किसी त्रासदी से कम नहीं है। इसकी हालत “मर्ज बढ़ता ही गया, ज्यों – ज्यों दवा की” जैसी हो गई है। परेशान लोग अब दंतेवाड़ा के रास्ते से होकर जगदलपुर से सुकमा के बीच ज्यादा लंबा रूट पकड़ने पर मजबूर हो रहे हैं।
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डीएमसी के बगैर अनाथ हुए पोटा केबिन

सुकमा जिले में समग्र शिक्षा अभियान में कार्यरत डीएमसी के रिटायर होने के बाद से शिक्षा विभाग के पोटा केबिन आवासीय विद्यालय लगभग अनाथ हो गए हैं। इन स्कूलों में बदइंतजामी के साथ बच्चों के बीमार पड़ने का सिलसिला जारी है। बच्चों में कभी फूड पॉयजनिंग, तो कभी मलेरिया का अटैक हो रहा है। दरअसल, डीएमसी का पद अब तक खाली पड़े रहने की असल वजह कुछ और ही है। इस पद के लिए पेपर वेट रखने की हैसियत वाले प्रमुख दावेदार कैंडिडेट का प्रोफाइल उस क्राइटेरिया में फिट नहीं बैठ रहा है, दूसरे कैंडिडेट उतना वजनी पेपरवेट नहीं रख पा रहे हैं। यही वजह है कि समग्र शिक्षा अभियान की कप्तानी करने नए डीएमसी का नाम फाइनल नहीं हो पा रहा है। इधर, छात्रावास में फूड पाइजनिंग के मामले में कलेक्टर ने पोलमपल्ली पोटा केबिन की अधीक्षिका को सस्पेंड कर बीईओ को नोटिस जारी किया है, वहीं दूसरी तरफ़ मरम्मत के नाम पर बगैर सूचना 50 दिन से बंद गंजेनार कन्या आश्रम की अधीक्षिका को मामला खुलने पर प्रभार से हटा दिया गया। इस मामले में ट्राइबल विभाग के सहायक आयुक्त अपनी जिम्मेदारी से साफ बच निकले। कुल मिलाकर सुकमा जिले में बच्चों के आवासीय परिसरों का हाल बेहाल है।

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कांग्रेस की तैयारी..
बस्तर में कांग्रेस ने लीडरशिप डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत अपने ब्लॉक अध्यक्षों का प्रशिक्षण शुरू कर दिया है। इसमें बड़े – बड़े दिग्गज नेता व मास्टर ट्रेनर्स आकर नेताओं – कार्यकर्ताओं को टिप्स दे रहे हैं। पार्टी ने पिछली बार कुर्सी दौड़ में चूक गए टीएस बाबा को ओपनिंग बैट्समैन बनाकर उतारा है, जो खुद ढाई – ढाई साल वाले फार्मूले के चक्रव्यूह में फंसकर रह गए थे। फिर भी उनके अनुभवों का लाभ पार्टी अपने कार्यकर्ताओं को दिलाना चाहती है। एक तरह से देखा जाए तो
कांग्रेस ने आगामी विधानसभा आम चुनाव के लिए कछुआ दौड़ की तरह रेस जीतने की तैयारी 2 साल पहले ही शुरू कर दी है।
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नवरत्न कंपनी को रिटायर्ड कर्मियों से मोह !
देश की नवरत्न कम्पनियों में शुमार और बस्तर में कार्यरत सार्वजनिक उपक्रम में रिटायर्ड कर्मियों को फिर से सेवा में लेने को लेकर बवाल मचा हुआ है। स्थानीय बेरोजगारों को प्राथमिकता देने की मांग को लेकर अक्सर तनातनी मची रहती है, उस पर रिटायर्ड कर्मियों को एक्सटेंशन देने से नाराजगी बढ़ती जा रही है।
इस संस्थान में एक बार नौकरी पा जाने के बाद कोई बंदा इतना आर्थिक रूप से सक्षम हो जाता है कि अगली पीढ़ी की नौकरी लगाने का खर्च मैनेज कर ले। साथ ही उसे वह गुप्त तरीका और ट्रिक भी पता चल जाता है, जिससे वह उतनी योग्यता और एप्रोच का जुगाड़ कर लेता है।

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न छाँव, न आसरा
दंतेवाड़ा में शक्तिपीठ मां दंतेश्वरी मंदिर के सामने जयस्तंभ चौक तक करोड़ों रुपए खर्च कर बनाए गए डोम टाइप शेड की स्थिति खजूर के पेड़ की तरह हो गई है, जिससे न तो गर्मी में ठीक से छांव मिलती है, न ही बारिश के मौसम में भीगने से बचाव होता है। रही – सही कसर मवेशी पूरा कर देते हैं। गौशाला की तरह यहां पसरे मवेशियों से खुद के सामान को बचाना दर्शनार्थियों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं होता। शेड की ऊंचाई इतनी ज्यादा है कि साइड से बारिश के थपेड़े लगने लगते हैं। ज्यादा चौड़े पिलर और उसके बीच आधी चौड़ाई में फिट किए गए डोम शेड की वजह से पिलर ही पानी से भीग जाते हैं। इसकी स्थिति पर यह लाइन फिट बैठती है –

बड़ा हुआ सो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर । पंथी को छाया नहीं, फल लागे अति दूर।

1 thoughts on“लाइलाज हुआ सुकमा रोड का मर्ज़.. (शब्द बाण – 151)

  1. बेहतरीन सर, हाँ, बिल्कुल सही लिखे हैँ, शिक्षा विभाग का यही हाल है,
    🙏🏼🙏🏼💐💐💐 शुभकामनायें

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